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Jammu News: स्कूल और कोचिंग छात्रों पर रहेगी अब पैनी नजर
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-सरकार ने नशा-रोधी उपाय अनिवार्य किए
नए दिशानिर्देशों में तलाशी, सीसीटीवी निगरानी, परामर्शदाता और हेल्पलाइन शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। स्कूली बच्चों में नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग से चिंतित जम्मू और कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों में सख्त निवारक उपाय अनिवार्य किए गए हैं।
विभाग की ओर से जोर दिया गया है कि छात्रों में नशीली दवाओं की लत न केवल उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए ख़तरा है बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य को भी कमज़ोर करती है। विभाग ने संस्थानों को तत्काल प्रभाव से निवारक उपाय अपनाने का निर्देश दिया है।
आदेश के अनुसार शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रवेश के समय छात्रों की तलाशी लेनी होगी ताकि नशीले पदार्थों को ले जाने से रोका जा सके। निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए स्कूल के समय में आकस्मिक तलाशी भी अनिवार्य कर दी गई है। संस्थानों के प्रमुखों को नियमित निरीक्षण करने और संदिग्ध व्यवहार का बिना किसी देरी के दस्तावेज़ीकरण और समाधान करने का निर्देश दिया गया है।
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प्रत्येक स्कूल को एक ''''नशा-मुक्त स्कूल नीति'''' बनानी होगी जिसमें निषेधों, रिपोर्टिंग तंत्रों और अनुशासनात्मक परिणामों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया हो। इसके अलावा एक सुरक्षित और नशा-मुक्त वातावरण बनाए रखने के लिए शिक्षकों, अभिभावकों और छात्र प्रतिनिधियों वाली सतर्कता समितियां स्थापित की जाएंगी। आदेश में स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने का भी आह्वान किया गया है। कैंटीन, एकांत कोनों और आस-पास की दुकानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित मामलों से निपटने के लिए प्रत्येक स्कूल को एक शिक्षण अधिकारी को प्रशिक्षित परामर्शदाता के रूप में नियुक्त करना होगा जबकि सभी संस्थानों में परामर्श प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। निदेशालय, एससीईआरटी, डीआईईटी और आईएमएचएएनएस के सहयोग से इन अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
तत्काल सहायता के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय में एक समर्पित नशा निवारण हेल्पलाइन की स्थापना की घोषणा की है। स्कूल अधिकारियों द्वारा छात्रों के साथ दुर्व्यवहार या लापरवाही के मामलों की सीधे इस हेल्पलाइन पर सूचना दी जानी है जो उन्हें त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों को अग्रेषित करेगी।
इसके अलावा जागरूकता और अभिभावकों की भागीदारी की भूमिका पर भी ज़ोर दिया गया है। स्कूलों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालने वाले नियमित जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए कहा गया है। पुलिस, आईएमएचएएनएस, गैर सरकारी संगठन और शिक्षक शिक्षा संस्थान निरंतर जागरूकता अभियान चलाने के लिए स्कूलों के साथ सहयोग करेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य युवा मन को हानिकारक प्रभावों से बचाना और शिक्षा की पवित्रता को बनाए रखना है। स्कूल और कोचिंग सेंटर न केवल सीखने के स्थान हैं बल्कि चरित्र निर्माण के भी स्थान हैं। छात्रों को नशीली दवाओं के खतरे से बचाना उनकी भलाई और हमारे समाज के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।
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नए दिशानिर्देशों में तलाशी, सीसीटीवी निगरानी, परामर्शदाता और हेल्पलाइन शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। स्कूली बच्चों में नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग से चिंतित जम्मू और कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग और ट्यूशन सेंटरों में सख्त निवारक उपाय अनिवार्य किए गए हैं।
विभाग की ओर से जोर दिया गया है कि छात्रों में नशीली दवाओं की लत न केवल उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए ख़तरा है बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य को भी कमज़ोर करती है। विभाग ने संस्थानों को तत्काल प्रभाव से निवारक उपाय अपनाने का निर्देश दिया है।
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आदेश के अनुसार शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रवेश के समय छात्रों की तलाशी लेनी होगी ताकि नशीले पदार्थों को ले जाने से रोका जा सके। निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए स्कूल के समय में आकस्मिक तलाशी भी अनिवार्य कर दी गई है। संस्थानों के प्रमुखों को नियमित निरीक्षण करने और संदिग्ध व्यवहार का बिना किसी देरी के दस्तावेज़ीकरण और समाधान करने का निर्देश दिया गया है।
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प्रत्येक स्कूल को एक ''''नशा-मुक्त स्कूल नीति'''' बनानी होगी जिसमें निषेधों, रिपोर्टिंग तंत्रों और अनुशासनात्मक परिणामों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया हो। इसके अलावा एक सुरक्षित और नशा-मुक्त वातावरण बनाए रखने के लिए शिक्षकों, अभिभावकों और छात्र प्रतिनिधियों वाली सतर्कता समितियां स्थापित की जाएंगी। आदेश में स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने का भी आह्वान किया गया है। कैंटीन, एकांत कोनों और आस-पास की दुकानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित मामलों से निपटने के लिए प्रत्येक स्कूल को एक शिक्षण अधिकारी को प्रशिक्षित परामर्शदाता के रूप में नियुक्त करना होगा जबकि सभी संस्थानों में परामर्श प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएंगे। निदेशालय, एससीईआरटी, डीआईईटी और आईएमएचएएनएस के सहयोग से इन अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
तत्काल सहायता के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशालय में एक समर्पित नशा निवारण हेल्पलाइन की स्थापना की घोषणा की है। स्कूल अधिकारियों द्वारा छात्रों के साथ दुर्व्यवहार या लापरवाही के मामलों की सीधे इस हेल्पलाइन पर सूचना दी जानी है जो उन्हें त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों को अग्रेषित करेगी।
इसके अलावा जागरूकता और अभिभावकों की भागीदारी की भूमिका पर भी ज़ोर दिया गया है। स्कूलों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालने वाले नियमित जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए कहा गया है। पुलिस, आईएमएचएएनएस, गैर सरकारी संगठन और शिक्षक शिक्षा संस्थान निरंतर जागरूकता अभियान चलाने के लिए स्कूलों के साथ सहयोग करेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य युवा मन को हानिकारक प्रभावों से बचाना और शिक्षा की पवित्रता को बनाए रखना है। स्कूल और कोचिंग सेंटर न केवल सीखने के स्थान हैं बल्कि चरित्र निर्माण के भी स्थान हैं। छात्रों को नशीली दवाओं के खतरे से बचाना उनकी भलाई और हमारे समाज के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।