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श्रीनगर के सेंट्रल जेल में कैदियों ने शुरू की भूख हड़ताल, एफआईआर वापस लेने की मांग
Tue, 16 Apr 2019 01:04 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 16 Apr 2019 01:04 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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श्रीनगर की सेंट्रल जेल में विभिन्न मांगों को लेकर कैदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। कैदियों ने जेल अधीक्षक का तबादला करने, उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लेने तथा उन्हें बाहरी जेलों में नहीं भेजने को लेकर आवाज उठाई है।
बता दें कि कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कैदियों ने समाचार पत्र समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की है। इसके अलावा पवित्र कुरान सहित अन्य पुस्तकों को पढ़ने की अनुमति देने को कहा है।
कैदियों के साथ बातचीत के बाद, बार एसोसिएशन के वकीलों की पांच सदस्यीय टीम ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कैदियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कैदियों को जिम्मेदार ठहराया गया था लेकिन आग वास्तव में पुलिस और अर्धसैनिक बल के आंसू गैस के गोले दागने के कारण लगी थी।
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उन्हें वहां कैदियों के जेल के अंदर किए गए विरोध प्रदर्शनों को निपटाने के लिए बुलाया था। बार की रिपोर्ट के अनुसार, कैदियों को किसी भी रिश्तेदार से मिलने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा उन्हें टीवी या रेडियो जैसे किसी भी मीडिया या समाचार पत्र तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कैदियों को लगता है कि उन्हें राज्य के बाहर किसी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है ताकि जेल में उनके मुकदमे और हिरासत को लंबा किया जा सके। उन्होंने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च न्यायालय द्वारा जांच की जानी चाहिए।
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बता दें कि कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि कैदियों ने समाचार पत्र समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की है। इसके अलावा पवित्र कुरान सहित अन्य पुस्तकों को पढ़ने की अनुमति देने को कहा है।
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कैदियों के साथ बातचीत के बाद, बार एसोसिएशन के वकीलों की पांच सदस्यीय टीम ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कैदियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कैदियों को जिम्मेदार ठहराया गया था लेकिन आग वास्तव में पुलिस और अर्धसैनिक बल के आंसू गैस के गोले दागने के कारण लगी थी।
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उन्हें वहां कैदियों के जेल के अंदर किए गए विरोध प्रदर्शनों को निपटाने के लिए बुलाया था। बार की रिपोर्ट के अनुसार, कैदियों को किसी भी रिश्तेदार से मिलने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा उन्हें टीवी या रेडियो जैसे किसी भी मीडिया या समाचार पत्र तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कैदियों को लगता है कि उन्हें राज्य के बाहर किसी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है ताकि जेल में उनके मुकदमे और हिरासत को लंबा किया जा सके। उन्होंने मांग की है कि इस पूरी घटना की उच्च न्यायालय द्वारा जांच की जानी चाहिए।