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कश्मीरी केसर के नाम पर बिक रहा नकली माल

Sun, 15 Mar 2015 10:22 AM IST
Updated Sun, 15 Mar 2015 10:22 AM IST
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special story on kashmiri kesar

कश्मीर के केसर को कुदरत की मार झेलनी पड़ी है। केसर उगाने वाले किसानों को इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। पिछले साल कश्मीर में आई बाढ़ का असर केसर की फसल पर साफ तौर पर दिख रहा है। केसर एक ऐसी फसल है, जिसे पानी की औसत आवश्यकता होती है।

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पानी अधिक मिलने पर यह नहीं होता और पानी कम हो तो भी नहीं होता। बाढ़ की वजह से पैदावार 50 फीसदी कम हो गई। कृषि विभाग के आयुक्त सचिव असगर सामून का कहना है कि बाढ़ की वजह से केसर की फसल को बहुत नुकसान हुआ है। हमारी कोशिश है कि इस साल इन बल्वों को मल्टीपल कर फसल में बढ़ोतरी की जाए, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।
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जून-जुलाई में इसकी खेती को बढ़ावा देने की कोशिश होगी। केसर की कमी के कारण बाजार में नकली केसर भी जमकर बेची जा रही है।

8 टन कम पैदावार हुई

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कश्मीर संभाग के पांपोर, बड़गाम में 4000 हेक्टेयर पर 15 टन पैदावार होती है। प्रतिवर्ष केसर से होने वाली कमाई 600 करोड़ तक की है, लेकिन पिछले वर्ष आई बाढ़ से पैदावार 8 टन हुई और इससे कमाई भी 300 करोड़ कम हुई। किश्तवाड़ में भी 500 हेक्टेयर पर केसर की पैदावार होती है।

कुल खपत का 30 फीसदी कश्मीर से
देश में हर वर्ष केसर की खपत 50 टन है। इसमें से कश्मीर 15 टन पैदावार देता है। बाकी का ईरान और यूरोप से आता है, लेकिन कश्मीर का केसर इन दोनों जगहों से बेहतर है।

एक हजार हेक्टेयर पर अधिक पैदावार का लक्ष्य
कृषि विभाग के आयुक्त सचिव, असगर सामून का कहना है कि बाढ़ से नुकसान की भरपाई की कोशिश शुरू कर दी गई है। इस साल सैफरन मिशन के तहत एक हजार हेक्टेयर पर अधिक पैदावार का लक्ष्य है। कश्मीर में यहां 15 टन पैदावार होती है, अब इसे 30 टन तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

नकली केसर की भी मार

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कश्मीर के केसर के नाम पर अब नकली केसर का धंधा भी चल रहा है। शहर के मंदिरों, देश के अन्य मंदिरों और मार्केट में बिकने वाले केसर में मिलावट की जा रही है।

सही केसर का एक पत्ता भी पूरे पानी को पीला कर देता है। इस पर असगर का कहना है कि यह बात सच है कि नकली केसर बिक रहा है। इस पर शिकंजा कसने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है।

नई जगहों पर भी ट्रायल
अब तक कश्मीर के पांपोर, बड़गाम और किश्तवाड़ में ही केसर की खेती होती है, लेकिन अब सैफरन मिशन के तहत राज्य के कई जिलों में इसकी पैदावार करने की योजना बनाई गई है। राजोरी, पुंछ, कठुआ, भद्रवाह, रामबन सहित कुछ अन्य जिलों में भी इसे सफल ट्रायल हुए हैं।

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