हिमोफीलिया की दवाई के लिए जद्दोजहद
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रियासत में हिमोफीलिया बीमारी से ग्रस्त पीड़ितों को दवाई के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार ने जीएमसी जम्मू और श्रीनगर में केंद्र खोले हैं। लेकिन फंड के अभाव में अक्सर दवाई के लिए पीड़ितों की शिकायत रही है। इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव भी है।
अभी भी बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से अंजान है। मरीज के खून में ब्लड फैक्टर 7,8,9, वोन विलिब्रेंड आदि की कमी रहती है। जिससे चोट लग जाने पर पीड़ित के शरीर के उस हिस्से से खून का रिसाव रुक नहीं पाता है। खून में कई फैक्टर की कमी से क्लाट नहीं बनता है।
सरकार की ओर से जम्मू और श्रीनगर में हिमोफीलिया केंद्रों में दवाई के लिए एक करोड़ रुपये की राशि मुहैया करवाई गई थी। लेकिन इसका पीड़ितों तक पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। हिमोफीलिया जेनेटिक बीमारी है। यह पुरुषों में ज्यादा रहती है।
बहुत महंगा है इस मर्ज का इलाज
शरीर के संबंधित हिस्से से लगातार खून का रिसाव होने से उसके बेकार होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसमें पीड़ित के सिर, मांसपेशियां, विंड पाइप और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर चोट लगने पर स्थिति गंभीर रहती है। खून का रिसाव रोकने के लिए पीड़ित को अलग अलग फैक्टर के हिसाब से इंजेक्शन के जरिए डोज दी जाती है।
इसमें पांच हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक इलाज पर खर्च हो सकता है। अस्पताल में कई साल से हिमोफीलिया मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। हिमोफिलिया सोसायटी जम्मू के सचिव जगदीश शर्मा का कहना है कि उनके पास तीन सौ के करीब हिमोफीलिया के मरीज पंजीकृत हैं।
लेकिन राज्य में ऐसे मरीजों की संख्या सैकड़ों में हो सकती है। सोसायटी ऐसे मरीजों की शिनाख्त करके उनके बेहतर इलाज पर काम कर रही है। लेकिन अभी भी जागरूकता के अभाव में लोग इस बीमारी से अंजान हैं।