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आखिर क्यों उड़ा हुआ है कश्मीरी केसर का रंग?

Fri, 13 Mar 2015 01:07 PM IST
Updated Fri, 13 Mar 2015 01:07 PM IST
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special story about kashmiri kesar

पिछले साल सितंबर में आई बाढ़ से हुए नुकसान से पस्त कश्मीरी किसान केसर को लेकर दोहरी मार झेल रहे हैं। पिछले कुछ साल में पैदावार तो घटी ही है, ईरान से आने वाले केसर की मौजूदगी की वजह से कश्मीरी केसर के दाम गिर गए हैं। इसके अलावा ईरानी केसर को कश्मीरी केसर के नाम से भी बेचा जा रहा है।

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भारत केसर के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है और कश्मीर का इसमें खास योगदान है। कश्मीर घाटी में 3,200 हेक्टेयर जमीन पर केसर की खेती होती है। मुख्य क्षेत्र पम्पौर और बड़गाम जिला है। पिछले कुछ सालों से कश्मीर में बारिश और बर्फबारी घटी है जिससे केसर की पैदावार कम हो रही है और कश्मीर में ईरानी केसर अपनी जगह बना रहा है जिसकी कीमत कश्मीरी केसर से कम होती है।
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कश्मीर केसर एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वाणी के मुताबिक़ बाजार में ईरानी केसर पर कश्मीरी लेबल लगा कर सैलानियों को बेचा जाता है। ऐसा कश्मीर से बाहर भी किया जाता है। वह कहते हैं, 'ईरानी केसर जबसे कश्मीर आना शुरू हुआ तब से स्थानीय माल के भाव गिरने शुरू हो गए।
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आयात किए गए माल के दाम कम होते हैं।' इस समय कश्मीर में 1,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की दर से केसर बेचा जा रहा है जबकि चार साल पहले इसके दाम 2,500 से 3,000 तक थे। वाणी कहते हैं, 'कारोबार को नुकसान तो अपनी जगह है लेकिन इस वजह से कश्मीर के केसर उद्योग को बुरा नाम मिल रहा है। इसके अलावा खरीदारों को भी धोखा दिया जा रहा है।' इस वर्ष कश्मीर घाटी में सिर्फ 25 से 27 करोड़ फसल की पैदावार हुई है जबकि औसत पैदावार 125 से 130 करोड़ तक होती है।

केसर पर मौसम की मार

special story about kashmiri kesar

पम्पौर के गुलाम नबी गनाई का परिवार केसर की खेती पर ही निर्भर है। वह हर साल तीन किलो तक केसर उगाते थे लेकिन पिछले साल बाढ़ के कारण सिर्फ 250 ग्राम ही पैदा हुआ। अब बाजार में ईरानी केसर के कारण गिरे दाम ने इनकी कमर तोड़ दी है। कश्मीर में केसर की पैदावार घटने पर भारत सरकार ने साल 2010 में कश्मीर सैफरन मिशन स्कीम की शुरुआत की थी।

लेकिन सरकारी स्तर पर इससे जुड़े लोग भी मानते हैं कि इसकी प्रगति धीमी है। कश्मीर के कृषि निदेशक पीरजादा मुश्ताक कहते हैं, 'चार साल पहले कश्मीर में एक हेक्टेयर पर ढाई किलो केसर पैदा होता थी, जिसमें अब 4.5 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यह कश्मीर सैफरन मिशन स्कीम की वजह से ही मुमकिन हो सका है।

लेकिन सिचांई विभाग के ठीक से काम न करने की वजह से लक्ष्य के मुताबिक पैदावार में बढ़ोतरी नहीं हो सकी।' कश्मीर में केसर की पैदावर घटने के कई कारण हैं। वाणी के अनुसार, 'पिछले सात-आठ सालों से कश्मीर का मौसम केसर की फसल के अनुकूल नहीं रहा। समय पर बारिश नहीं होती। इसके अलावा दस साल पहले किसान तीन साल फसल लेने के बाद जमीन पर एक साल फसल नहीं बोते थे, लेकिन ऐसा अब नहीं किया जाता।'

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