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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   sleeper cells threatened of army movements on border

सेना के खौफ से भारतीय सीमा से भागे आतंकियों के स्लीपर सेल और गाइड

Tue, 04 Oct 2016 11:35 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 04 Oct 2016 11:35 AM IST
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sleeper cells threatened of army movements on border
Terrorist - फोटो : File Photo
भारत-पाक सीमा पर युद्ध जैसे हालात और सुरक्षा बलों की मूवमेंट बढ़ी है। सीमा पर मौजूद आतंकी स्लीपर सैल और गाइड इस स्थिति में डर के मारे शिफ्ट कर गए हैं। सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की रडार पर मौजूद संदिग्ध स्लीपर सैल और गाइड के ठिकानाें को खंगाला। सभी जगह से सीमा सेे पलायन के नाम पर अंडरग्राउंड हो गए हैं। 
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सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सक्र्रिय हो गई हैं। सीमा पार से आतंकी घुसपैठ के बाद गाइड की तरह मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स भी नदारद हो गए हैं। गाइड की तरह काम करने वाले इन लोगों ने कई बार आतंकियों की मदद की है।
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आतंकी सीमा के इस पार घुसपैठ करने के बाद इन वर्करों ने ही ठिकाने पर पहुंचाया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार पहले ही कई लोग उनकी रडार पर थे। उन पर लगातार नजर रखी जा रही थी। 
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कई हमलावरों को दी थी पनाह

sleeper cells threatened of army movements on border
आतंकी कैंप - फोटो : demo
इस बीच सीमा पर बने हालात के कारण इन ओवरग्राउंड वर्कर व गाइड की भी धरपकड़ की जानी थी। इनके ठिकानों पर टीमें भी गईं, लेकिन कोई नहीं मिला। पलायन की आड़ में सभी अंडरग्राउंड हो गए हैं। जम्मू में पौनी चक्क में 2008 में आतंकी मुठभेड़, रेलवे स्टेशन पर 2002 में आतंकी हमला, हीरानगर पुलिस थाने में  2012 में पुलिस थाने में हमला, राजबाग पुलिस थाने पर 2015 में आतंकी हमलावरों को इन गाइड ने ही पनाह दी थी। 

सीमा से घुसपैठ के बाद इन गाइड का काम जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर मौजूद सैन्य ठिकानों तक पहुंचाना था। सफलतापूर्वक इन्हें हाईवे तक पहुंचाया गया और इन हमलों में कई लोग और पुलिस कर्मी शहीद हुए। स्लीपर सैल भी सीमा पर लगातार काम कर रहे थे। कई लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा भी गया। सबूत नहीं होने के कारण उन पर केवल नजर रखी जा रही थी। सीमा पर युद्ध जैसे हालात के कारण इनका कोई अता-पता नहीं चल रहा है। 
 
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