SKUAST Jammu: सपना नहीं हकीकत...वीसी साहब खेतों में काट रहे धान, तोड़ रहे बालियां
विश्वविद्यालय जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के नारे की तर्ज पर पढ़ाई को प्रायोगिक बनाने में लगा है, ताकि जब वे पढ़ाई कर निकलें तो उन्हें खेती की सभी बारीकियों की जानकारी हो।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यह सपना नहीं बल्कि हकीकत है। कंधे पर गमछा, हाथ में दराती लेकर धान की फसल काटते यह आम किसान नहीं बल्कि शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय (SKUAST) जम्मू के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा हैं। विश्वविद्यालय के चट्ठा फार्म में वीसी खुद धान कटाई से लेकर थ्रेशिंग का काम कर रहे हैं। उनके साथ कृषि स्नातक के विद्यार्थी भी खेती-किसानी के गुर सीख रहे हैं। विश्वविद्यालय जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के नारे की तर्ज पर पढ़ाई को प्रायोगिक बनाने में लगा है, ताकि जब वे पढ़ाई कर निकलें तो उन्हें खेती की सभी बारीकियों की जानकारी हो। डिग्री हासिल करना ही उनका मकसद न हो बल्कि पढ़ाई की हकीकत में प्रायोगिक जानकारी भी हो।
छात्राएं भी धान काटने से लेकर उसकी थ्रेशिंग करने के गुर सीख रही हैं। बिना किसी हिचक के उन्हें फार्म हाउस में धान काटते देखा जा सकता है। इस साल लगभग ढाई एकड़ भूमि पर धान की खेती स्नातक की शिक्षा लेने वाले छात्र-छात्राओं ने की। अब धान की फसल कटने के बाद रबी की बोआई की जाएगी। विद्यार्थियों से धान, गेहूं के अलावा कॉमर्शियल फसल आलू व सरसों की भी खेती कराई गई। प्रशिक्षण ले रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें फसल उत्पादन का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिल रहा है। इससे वे फेल नहीं हो सकेंगे।
विद्यार्थियों को मिलता है मुनाफे का हिस्सा
विश्वविद्यालय में स्नातक में अध्ययनरत छात्रों को खेत में पैदा होने वाली फसलों को बेचा भी जाता है। फसल उगाने में लगने वाली लागत को काटकर शुद्ध लाभ निकाला जाता है। इसका आधा पैसा छात्रों के बीच वितरित किया जाता है। फिलहाल यह राशि कम होती है। अब विश्वविद्यालय की योजना है कि चार-चार छात्रों की टीम को एक हेक्टेयर भूमि में फसल उगाने के लिए प्रेरित किया जाए। इससे उन्हें मुनाफा भी अधिक मिलेगा। यह पढ़ाई के दौरान कमाई (अर्न व्हाइल लर्न) का हिस्सा होगा।
विवि ने खेत में काम कराने के लिए उपलब्ध कराए ड्रेस
विश्वविद्यालय प्रशासन ने खेत में काम करने के लिए विद्यार्थियों को ड्रेस भी उपलब्ध कराए हैं। साथ ही छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम की सुविधा भी उपलब्ध कराई है ताकि वे घर से पहनकर आने वाले ड्रेस को चेंज कर खेतों में जाएं। काम समाप्त करने के बाद वे पुन: अपने कपड़े पहन लें।
जमीन से जोड़ रहे, जॉब प्रोवाइडर की योग्यता कर रहे विकसित
कृषि स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले बच्चों को जमीन से जोड़ा जा रहा है। डिग्री हासिल करना अलग बात है, लेकिन यदि वे फील्ड से जुड़ेंगे तो उन्हें खेती-किसानी की हर बारीकियों की जानकारी होगी। वे इसमें पूरी तरह दक्ष होंगे। इन विद्यार्थियों को जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब प्रोवाइडर के रूप में तैयार किया जा रहा है। उनमें कोई न कोई हुनर विकसित करना मकसद है ताकि उनमें उद्यमिता का भाव विकसित हो। - प्रो. जेपी शर्मा, वाइसचांसलर