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मैं बालिग हूं, अगर परिवार नहीं मानता तो खटखटा सकती हूं कोर्ट का दरवाजा: मंजोत

Sun, 02 Dec 2018 06:32 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, जम्मू
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 02 Dec 2018 06:32 AM IST
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Sikh girl ready to volunteer her kidney donate to Muslim friend
सामरीन अख्तर और मंजोत सिंह कोहली - फोटो : अमर उजाला
जम्मू के ऊधमपुर की रहने वाली एक सिख युवती ने पेश की इंसानियत की मिसाल। अपनी एक मुस्लिम सहेली को स्वेछापूर्वक अपनी किडनी डोनेट करने को तैयार हुई। 
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लेकिन युवती का आरोप है कि पिछले कई महीने से शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंसिस (स्किम्स) प्रबंधन इस पूरी प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। स्किम्स के निदेशक के अनुसार जल्द ही कमेटी बैठेगी और इस मामले पर गौर किया जाएगा।

मंजोत सिंह कोहली (23) जोकि जम्मू के ऊधमपुर की रहने वाली हैं, उन्होंने अमर उजाला के साथ बात करते हुए बताया कि वो एक सोशल ऐक्टिविस्ट हैं और राजौरी की रहने वाली सामरीन अख्तर उनकी दोस्त हैं, पिछले 4 सालों से दोनों की दोस्ती है। 
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उन्होंने बताया कि सामरीन उनके साथ सोशल वर्क में भी उनका सहयोग करती आई हैं। मंजोत ने बताया कि सामरीन ने अपनी बीमारी के बारे में कभी नहीं बताया लेकिन उन्हें उन दोनों की एक दोस्त से जब यह बात पता चली तो वह यहां चली आई और पिछले 4 महीने से समरीन के साथ श्रीनगर स्किम्स में हूं जहां उसका इलाज जारी है। 
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Sikh girl ready to volunteer her kidney donate to Muslim friend
सामरीन अख्तर - फोटो : अमर उजाला
उसने बताया कि उसपर किसी किस्म का कोई दबाव नहीं है बस केवल इंसानियत के नाते अपनी किडनी डोनेट करने की ठानी है। मंजोत के अनुसार, समरीन भी 22 वर्ष की हैं और केवल मुझसे एक साल छोटी हैं। अगर मुझे जीने का अधिकार है तो उसे भी है, उसने भी अभी काफी जीवन जीना है।

वहीं स्किम्स में इलाज करवा रही मुस्लिम युवती समरीन अख्तर ने कहा कि वह इस निस्वार्थ कृत्य के लिए अपनी सहेली की शुक्रगुजार है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर कह रहे हैं कि धार्मिक मुद्दा बन जाएगा, लेकिन मंजोत ने यह नहीं सोचा कि मैं एक मुस्लिम हूं वो तो इंसानियत के नाते अपना फर्ज निभा रही है 

अगर ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा तो मिसालें कैसे पेश की जाएंगी। समरीन ने कहा कि हो सकता हैं कि हमारा यह उदाहरण देख बाकि लोग भी जाग जाएंगे। बिना धर्म जाती की परवाह किए इंसानियत का फर्ज़ निभाएंगे।

बता दें कि अमर उजाला के पास माजूद एक ऐफिडेविट के अनुसार मंजोत ने 26 मई, 2018 को सामरीन को अपनी किडनी डोनेट करने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन मंजोत के अनुसार, उनके परिवार द्वारा अस्पताल प्रबंधन को एक नोटिस भी भेजा गया था तब से आज तक अस्पताल टाल मटोल कर रहा है और इस मसले को यहीं लटका के रखा हुआ है। 

Sikh girl ready to volunteer her kidney donate to Muslim friend
मंजोत सिंह कोहली - फोटो : अमर उजाला
उसके अनुसार, अस्पताल को डर है कहीं कोई सांप्रदायिक मुद्दा न बन जाए पर उन्हें एक मासूम की जान की परवाह करनी चाहिए। मंजोत ने कहा कि आज उन्होंने अपनी वकील दीपिका रजावत के साथ स्किम्स के निदेशक से मुलाकात की है।

उनके सामने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसलों की मिसाल पेश की जो हमारे ही मामले की तरह थी और इसके बाद निदेशक ने आश्वासन दिलाया है कि जल्द ही इसमें कोई फैसला लिया जाएगा। मंजोत ने यह भी कहा कि मैं बालिग हूं और अगर परिवार नहीं मानता तो मुझे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर जब स्किम्स के निदेशक डॉ. उमर से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमने ऑथराइजेशन कमेटी को इस बारे में बताया है, जल्द से जल्द इस मामले को लेकर मीटिंग बुलाई जाएगी और कोई फैसला इसको लेकर लिया जाएगा।
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