{"_id":"6a8f58241c175744800b0966","slug":"sidhra-flyover-accident-jammu-news-c-10-1-jam1005-997309-2026-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: सिद्दड़ा में फ्लाईओवर हादसे के बाद पिलर के \nपास टूटी शटरिंग और पाइप के निशान गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: सिद्दड़ा में फ्लाईओवर हादसे के बाद पिलर के पास टूटी शटरिंग और पाइप के निशान गायब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जांच टीम के पहुंचने से पहले निर्माण एजेंसी ने मजदूरों तक को शिफ्ट कर नए तैनात कर दिए
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के सिद्दड़ा में फ्लाईओवर हादसे के बाद जांच टीम पहुंचने से पहले लापरवाही के सभी सबूत हटा दिए गए हैं। फ्लाईओवर के पिलर के साथ बंद लेन पर कहां शटरिंग के पाइप थे और कहां बैरिकेड्स लगाए गए थे, कोई निशान नहीं बचा है। मंगलवार को दिन में ओवरस्पीड ट्रक की टक्कर से पिलर के किनारे सीमेंटेड स्लैब को रोकने के लिए लगाई गई शटरिंग गिर गई थी। इस हादसे में एक मजदूर की जान चली गई।
जांच टीम के पहुंचने से पहले ही दुर्घटनास्थल से तमाम साक्ष्य हटा दिए गए हैं। वर्तमान में फ्लाईओवर पिलर के पास न तो टूटी शटरिंग व पाइप के निशान हैं और न ही यह पता चल पा रहा है कि बंद लेन पर बैरिकेड्स कहां लगाए गए थे। साक्ष्यों को इतनी सफाई से गायब कर दिया गया है कि जांच अधिकारियों के सामने हादसे की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया है। यहां तक कि निर्माण एजेंसी ने मजदूरों तक को शिफ्ट कर उनकी जगह नए मजदूर लगा दिए हैं। आरोप है कि अपनी विफलता छिपाने के लिए निर्माण एजेंसी ने जल्दबाजी में मौके को साफ कर दिया है। जांच टीम के आने से पहले साक्ष्य हटाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा बैरिकेडिंग वास्तव में मानक के अनुरूप लगाई भी गई थी या नहीं।
-- -- -- --
हेलमेट न होने से सिर पर आई गंभीर चोट
हादसे के वक्त कार्यस्थल पर मौजूद मजदूर ने सुरक्षा मानकों के तहत हेलमेट नहीं पहना था। ट्रक की टक्कर से शटरिंग के पाइप उखड़े और स्लैब का हिस्सा सीधे उसके सिर पर जा गिरा जिससे वह लहूलुहान हो गया। साथी कामगारों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान जा चुकी थी।
विज्ञापन
-- -- -- --
सीसीटीवी बंद होने से
ट्रक चालक की पहचान नहीं
घटनास्थल और आसपास एनएचएआई की साइट पर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। ऐसे में ट्रक और उसके चालक की पहचान करना पुलिस व एनएचएआई अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल पुलिस हाईवे के अन्य हिस्सों और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपी चालक का सुराग लगाने का प्रयास कर रही है।
-- -- -- --
30 प्रतिशत अधूरा काम करना बड़ी चुनौती
एनएचएआई का यह प्रोजेक्ट परियोजना निदेशक (पीडी) उधमपुर के तहत डाबर कंपनी की ओर से कराया जा रहा है। बीते दो वर्षों में प्रोजेक्ट का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अब भारी यातायात दबाव के बीच शेष 30 प्रतिशत काम को सुरक्षित रूप से पूरा करना निर्माण एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
-- -- -- --
सुरक्षा मानकों की जांच के
लिए दो संस्थानों से करार
एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट में सड़क एवं सुरक्षा मानकों की नियमित जांच के लिए आईआईटी जम्मू और भारत सरकार की आईसीटी अथॉरिटी के साथ करार किया है। ये तकनीकी टीमें हर तीन महीने में निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देती हैं। इन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर निर्माण एजेंसी पर पूर्व में पांच बार 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
-- -- -- --
यह प्रोजेक्ट पिछले दो साल से चल रहा है और आज तक बैरिकेड्स तोड़कर किसी वाहन के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की ऐसी घटना नहीं हुई थी। हमारी ओर से समय-समय पर सुरक्षा उपायों की जांच कराई जाती है। हादसे के तुरंत बाद तकनीकी टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है जिसमें निर्माण एजेंसी की ओर से लापरवाही की बात सामने नहीं आई है।
-ईश गुप्ता, परियोजना निदेशक (पीडी), एनएचएआई
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के सिद्दड़ा में फ्लाईओवर हादसे के बाद जांच टीम पहुंचने से पहले लापरवाही के सभी सबूत हटा दिए गए हैं। फ्लाईओवर के पिलर के साथ बंद लेन पर कहां शटरिंग के पाइप थे और कहां बैरिकेड्स लगाए गए थे, कोई निशान नहीं बचा है। मंगलवार को दिन में ओवरस्पीड ट्रक की टक्कर से पिलर के किनारे सीमेंटेड स्लैब को रोकने के लिए लगाई गई शटरिंग गिर गई थी। इस हादसे में एक मजदूर की जान चली गई।
जांच टीम के पहुंचने से पहले ही दुर्घटनास्थल से तमाम साक्ष्य हटा दिए गए हैं। वर्तमान में फ्लाईओवर पिलर के पास न तो टूटी शटरिंग व पाइप के निशान हैं और न ही यह पता चल पा रहा है कि बंद लेन पर बैरिकेड्स कहां लगाए गए थे। साक्ष्यों को इतनी सफाई से गायब कर दिया गया है कि जांच अधिकारियों के सामने हादसे की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया है। यहां तक कि निर्माण एजेंसी ने मजदूरों तक को शिफ्ट कर उनकी जगह नए मजदूर लगा दिए हैं। आरोप है कि अपनी विफलता छिपाने के लिए निर्माण एजेंसी ने जल्दबाजी में मौके को साफ कर दिया है। जांच टीम के आने से पहले साक्ष्य हटाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा बैरिकेडिंग वास्तव में मानक के अनुरूप लगाई भी गई थी या नहीं।
विज्ञापन
हेलमेट न होने से सिर पर आई गंभीर चोट
हादसे के वक्त कार्यस्थल पर मौजूद मजदूर ने सुरक्षा मानकों के तहत हेलमेट नहीं पहना था। ट्रक की टक्कर से शटरिंग के पाइप उखड़े और स्लैब का हिस्सा सीधे उसके सिर पर जा गिरा जिससे वह लहूलुहान हो गया। साथी कामगारों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान जा चुकी थी।
विज्ञापन
सीसीटीवी बंद होने से
ट्रक चालक की पहचान नहीं
घटनास्थल और आसपास एनएचएआई की साइट पर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। ऐसे में ट्रक और उसके चालक की पहचान करना पुलिस व एनएचएआई अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल पुलिस हाईवे के अन्य हिस्सों और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपी चालक का सुराग लगाने का प्रयास कर रही है।
30 प्रतिशत अधूरा काम करना बड़ी चुनौती
एनएचएआई का यह प्रोजेक्ट परियोजना निदेशक (पीडी) उधमपुर के तहत डाबर कंपनी की ओर से कराया जा रहा है। बीते दो वर्षों में प्रोजेक्ट का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अब भारी यातायात दबाव के बीच शेष 30 प्रतिशत काम को सुरक्षित रूप से पूरा करना निर्माण एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सुरक्षा मानकों की जांच के
लिए दो संस्थानों से करार
एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट में सड़क एवं सुरक्षा मानकों की नियमित जांच के लिए आईआईटी जम्मू और भारत सरकार की आईसीटी अथॉरिटी के साथ करार किया है। ये तकनीकी टीमें हर तीन महीने में निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देती हैं। इन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर निर्माण एजेंसी पर पूर्व में पांच बार 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
यह प्रोजेक्ट पिछले दो साल से चल रहा है और आज तक बैरिकेड्स तोड़कर किसी वाहन के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की ऐसी घटना नहीं हुई थी। हमारी ओर से समय-समय पर सुरक्षा उपायों की जांच कराई जाती है। हादसे के तुरंत बाद तकनीकी टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है जिसमें निर्माण एजेंसी की ओर से लापरवाही की बात सामने नहीं आई है।
-ईश गुप्ता, परियोजना निदेशक (पीडी), एनएचएआई