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सुव्यवस्था और अनुशासन से होगी विश्व शांति: सुभाष शास्त्री
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अराजी मोहल्ले में जारी श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक ने किए प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के अराजी मोहल्ले में जारी श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि धर्म का अर्थ है धारण करना या कर्त्वय पालन करना। उन्होंने प्रवचन में कहा कि जहां हृदय शुभ गुणवत्ता होगी, वहां शांति और एकरूपता होगी। जहां शांति व एकरूपता होगी वहां सुव्यवस्था होगी। यदि सुव्यवस्था और अनुशासन होगा तो विश्व शांति भी उपलब्ध हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार विश्व शांति प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की स्थिति पर निर्भर है। अच्छे गुण पैदा करना और अच्छे चरित्र का पालन करना ही आत्म अनुशीलन का रास्ता है। यदि प्रत्येक मनुष्य यह समझ ले कि सभी जीवात्माओं में परमात्मा भी मौजूद है और इस भावना के साथ निष्काम कर्म करें तो वह निश्चित रूप से मानसिक शांति प्राप्त कर लेगा। शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के पूरे जीवन काल में और उसकी मृत्यु के बाद भी सिर्फ धर्म ही उसका साथ देता है। अंत समय में जब उसे सबको छोड़ना पड़ता है और सब उसे छोड़ देते हैं। उस वक्त भी धर्म ही उसका मित्र होता है। नीति में कहा गया है कि जीवन का मित्र आहार है, रोगी का मित्र वैध है और मरने वाले का मित्र धर्म है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के अराजी मोहल्ले में जारी श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि धर्म का अर्थ है धारण करना या कर्त्वय पालन करना। उन्होंने प्रवचन में कहा कि जहां हृदय शुभ गुणवत्ता होगी, वहां शांति और एकरूपता होगी। जहां शांति व एकरूपता होगी वहां सुव्यवस्था होगी। यदि सुव्यवस्था और अनुशासन होगा तो विश्व शांति भी उपलब्ध हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार विश्व शांति प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की स्थिति पर निर्भर है। अच्छे गुण पैदा करना और अच्छे चरित्र का पालन करना ही आत्म अनुशीलन का रास्ता है। यदि प्रत्येक मनुष्य यह समझ ले कि सभी जीवात्माओं में परमात्मा भी मौजूद है और इस भावना के साथ निष्काम कर्म करें तो वह निश्चित रूप से मानसिक शांति प्राप्त कर लेगा। शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के पूरे जीवन काल में और उसकी मृत्यु के बाद भी सिर्फ धर्म ही उसका साथ देता है। अंत समय में जब उसे सबको छोड़ना पड़ता है और सब उसे छोड़ देते हैं। उस वक्त भी धर्म ही उसका मित्र होता है। नीति में कहा गया है कि जीवन का मित्र आहार है, रोगी का मित्र वैध है और मरने वाले का मित्र धर्म है।
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