बदला माहौल: आतंकवाद से दूर हुआ बॉलीवुड फिर कश्मीर की वादियों में लौटा, एक साल से भी कम समय में 120 से अधिक फिल्मों की शूटिंग को अनुमति
घाटी में फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए गठित जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद की ओर से शूटिंग लोकेशन भी जारी की गई हैं ताकि इच्छुक फिल्म निर्माताओं को किसी विशेष प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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आतंकवाद के चलते अपनी पहली पसंद कश्मीर से दूर हुआ बॉलीवुड अब फिर घाटी की हसीन वादियों में लौटने लगा है। यूरोप और हिमाचल समेत अन्य स्थलों की ओर रुख करने वाले निर्माता-निर्देशकों का कश्मीर घाटी के प्रति रुझान बढ़ा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद माहौल में आए बदलाव, सुरक्षा स्थिति में सुधार और उप राज्यपाल प्रशासन की ओर से घोषित पहली फिल्म नीति के चलते जम्मू-कश्मीर में फिल्म शूटिंग के लिए कई निर्माता निर्देशक पहुंच रहे हैं। फिल्म नीति घोषित होने के बाद एक साल से भी कम समय में 120 से अधिक फिल्मों की शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है। इनमें हिंदी के साथ ही दक्षिण भारतीय और पंजाबी फिल्में भी शामिल हैं।
प्रदेश में फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए गठित जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद की ओर से शूटिंग लोकेशन भी जारी की गई हैं ताकि इच्छुक फिल्म निर्माताओं को किसी विशेष प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यदि कोई फिल्म शूटिंग के लिए अनुमति चाहता है तो सारी प्रक्रिया को चार से पांच दिनों में पूरा किया जा रहा है। सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि 120 से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग को अनुमति दे दी गई है। इनमें क्षेत्रीय फिल्में भी शामिल हैं। कई और आवेदन प्रक्रिया में है। टी सीरीज समेत कई नामी घराने यहां शूटिंग के लिए आ रहे हैं।
बदले माहौल में कई फिल्मों की चल रही शूटिंग
370 हटने के बाद सुरक्षा संबंधी मुद्दे का व्यापक स्तर पर समाधान कर लिया गया है। बॉलीवुड शूटिंग के लिए माहौल को सुरक्षित महसूस कर रहा है। इस वजह से कई फिल्मों की शूटिंग चल भी रही है। इस समय गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग के साथ ही श्रीनगर के बाग और डल झील में लाइट, कैमरा, एक्शन के स्वर गूंज रहे हैं।
फिल्म महोत्सव से और मिलेगा बल
जम्मू-कश्मीर में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 15 जून से होने जा रहा है। इसके लिए 320 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। राष्ट्रीय फिल्म विकास परिषद (एनएफडीसी) को प्रविष्टियों को शॉर्टलिस्ट करने का काम सौंपा गया है। चयनित फिल्मों को छह दिन तक चलने वाले महोत्सव में प्रदर्शित किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद के प्रमुख नीतीश्वर कुमार का कहना है कि फिल्म महोत्सव से भी प्रदेश में फिल्मों के प्रति आकर्षण और बढ़ेगा। यहां के स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिलेगा।
तीस वर्षों से लुप्त गौरव को लौटाने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर बॉलीवुड की पहली पसंद रहा है। यहां कई यादगार फिल्मों की शूटिंग हुई है। कश्मीर की वादियों को इन फिल्मों के जरिये ही पूरे देश में गौरव हासिल हुआ है। पिछले 30 वर्षों से यह गौरव व वैभव लुप्त हो गया था। अब इसे दोबारा स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। यूरोप के बजाय जम्मू-कश्मीर की ओर बॉलीवुड को लौटाने का प्रयास है। 120 फिल्मों की शूटिंग की अनुमति दी जा चुकी है। कई और प्रक्रिया में हैं। उम्मीद है यह रुझान और बढ़ेगा। फिल्मों के जम्मू-कश्मीर में लौटने से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा, साथ ही रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। - अक्षय लाबरू, अतिरिक्त सचिव, उप राज्यपाल सचिवालय व नोडल अधिकारी-जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद