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Jammu News: शिव तत्व अंदर ही मौजूद, कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं
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दिव्या ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में भगवान शिव कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के बॉर्डर मार्ग पर आरआरआर रिजॉर्ट में दिव्या ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में जारी पांच दिवसीय भगवान शिव कथा के दूसरे दिन की सभा में वीरवार को आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी जयंती भारती ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति करना है। ईश्वर प्राप्ति के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, शिव तत्व प्रत्येक व्यक्ति के अंतःकरण में मौजूद है।
कहा कि शास्त्र कहते हैं, देहम् शिवालयम् प्रोक्तम्। अर्थात यह देह ही शिवालय है। त्रिनेत्र धारी शिव को त्र्यंबकम भी कहा जाता है। प्रभु शिव के मस्तक पर विराजमान तृतीय नेत्र यह संकेत करता है कि प्रत्येक व्यक्ति की आंखों के मध्य शिव नेत्र विद्यमान है, जिसके खुलते ही अंतर जगत का अंधकार दूर हो जाता है और मनुष्य अपने भीतर प्रभु के दिव्य प्रकाश का दर्शन करता है। तृतीय नेत्र का उन्मूलन अर्थात खुलना किसी भी बाहरी क्रिया से संभव नहीं है। उसके लिए पूर्ण सतगुरु की शरणागत होना पड़ता है। कथा का समापन आरती के साथ हुआ, जिसमें विशेष तौर पर स्वामी सुचेता नंद, स्वामी शुक्रमा नंद, जंगबीर सिंह पूर्व भाजपा प्रधान सांबा, प्रो. राम सिंह, आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के बॉर्डर मार्ग पर आरआरआर रिजॉर्ट में दिव्या ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में जारी पांच दिवसीय भगवान शिव कथा के दूसरे दिन की सभा में वीरवार को आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी जयंती भारती ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति करना है। ईश्वर प्राप्ति के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि, शिव तत्व प्रत्येक व्यक्ति के अंतःकरण में मौजूद है।
कहा कि शास्त्र कहते हैं, देहम् शिवालयम् प्रोक्तम्। अर्थात यह देह ही शिवालय है। त्रिनेत्र धारी शिव को त्र्यंबकम भी कहा जाता है। प्रभु शिव के मस्तक पर विराजमान तृतीय नेत्र यह संकेत करता है कि प्रत्येक व्यक्ति की आंखों के मध्य शिव नेत्र विद्यमान है, जिसके खुलते ही अंतर जगत का अंधकार दूर हो जाता है और मनुष्य अपने भीतर प्रभु के दिव्य प्रकाश का दर्शन करता है। तृतीय नेत्र का उन्मूलन अर्थात खुलना किसी भी बाहरी क्रिया से संभव नहीं है। उसके लिए पूर्ण सतगुरु की शरणागत होना पड़ता है। कथा का समापन आरती के साथ हुआ, जिसमें विशेष तौर पर स्वामी सुचेता नंद, स्वामी शुक्रमा नंद, जंगबीर सिंह पूर्व भाजपा प्रधान सांबा, प्रो. राम सिंह, आदि मौजूद रहे।
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