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कश्मीर में बीते बचपन की यादों को ताजी करती है फिल्म शिकारा, ये रही लोगों की प्रतिक्रिया
Sat, 08 Feb 2020 08:17 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 08 Feb 2020 08:17 PM IST
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कश्मीरी पंडितों के पलायन की पृष्ठिभूमि में उम्मीद और मोहब्बत की एक प्रेम कहानी है। 120 मिनट अवधि की हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म शिकारा कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद की कहानी को बयां करती है। फिल्म कश्मीरी पंडितों की प्रेम कहानी के जरिए पूरे डिस्कोर्स पर एक संदेश देती है।
फिल्म देखने पहुंचे कश्मीरी पंडित मोती लाल पाडरू फिल्म की प्रशंसा करते हुए कहते हैं जितना भी फिल्म में दिखाया है वह सच्ची कहानी को बयां करता है। हालांकि, फिल्म में उस हकीकत को नहीं दिखाया जो कश्मीरी पंडितों के साथ घटी है। फिल्म में 1990 से पहले जवानी और बचपन की यादें ताजा हो गईं। कहा कि फिल्म कश्मीर में पंडितों और कश्मीरी मुस्लिम के बीच भाईचारे और प्रेम को बताती है।
फिल्म एक संदेश देती है कि इंसानियत इसी में है कि भूलो और माफ करो। कश्मीरी पंडित आरएल पंडिता ने कहा कि फिल्म में मुख्य कलाकारों के बीच की प्रेम कहानी कश्मीर के उस समय के अमन और प्रेम को उजागर करती है। फिल्म में कश्मीर की सुंदरता को बड़ी ही खूबसूरती से बयां किया गया है।
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फिल्म देखने पहुंचे कश्मीरी पंडित मोती लाल पाडरू फिल्म की प्रशंसा करते हुए कहते हैं जितना भी फिल्म में दिखाया है वह सच्ची कहानी को बयां करता है। हालांकि, फिल्म में उस हकीकत को नहीं दिखाया जो कश्मीरी पंडितों के साथ घटी है। फिल्म में 1990 से पहले जवानी और बचपन की यादें ताजा हो गईं। कहा कि फिल्म कश्मीर में पंडितों और कश्मीरी मुस्लिम के बीच भाईचारे और प्रेम को बताती है।
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फिल्म एक संदेश देती है कि इंसानियत इसी में है कि भूलो और माफ करो। कश्मीरी पंडित आरएल पंडिता ने कहा कि फिल्म में मुख्य कलाकारों के बीच की प्रेम कहानी कश्मीर के उस समय के अमन और प्रेम को उजागर करती है। फिल्म में कश्मीर की सुंदरता को बड़ी ही खूबसूरती से बयां किया गया है।
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फिल्म मुझे मेरे बचपन की याद दिलाती है। कश्मीर में हमारे घर, कारोबार, खेतों की यादों को ताजी करती है। इसमें पुरानी बातें भूलकर अपनों के बीच भाईचारों को बढ़ावा देने का संदेश देती है। फिल्म की कहानी अच्छी है, हालांकि इसमें कश्मीरी पंडितों के साथ घटित उस दर्दनाक हादसे को नहीं दिखाया गया है।-मोती लाल पाडरू, कश्मीरी पंडित
फिल्म हमारे जैसे युवाओं को अपने पुश्तैनी घर की याद दिलाती है। हमारे लिए यह नया अनुभव है जब हम फिल्म के माध्यम से कश्मीर में हमारे परिवारों से हुए हादसे को देख रहे हैं।-मीनू, कश्मीरी पंडित
फिल्म में कश्मीरी पंडितों की प्रेम कहानी बड़ी सुंदरता से बयां की गई है। इसमें मुख्य किरदारों के बीच का पवित्र प्रेम प्रेरणा स्रोत है। फिल्म हमारे लिए एक नया अनुभव है। जो बातें हम अपने परिवार के बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं, उसे बड़े पर्दे पर देख रहे हैं।-आकाश, कश्मीरी पंडित
फिल्म के माध्यम से कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए हादसे को जानने का मौका मिला। फिल्म में कश्मीर की सुंदरता देखते ही बनती है। काफी अच्छी फिल्म है।-पूनम शर्मा, हिमाचल निवासी
फिल्म हमारे जैसे युवाओं को अपने पुश्तैनी घर की याद दिलाती है। हमारे लिए यह नया अनुभव है जब हम फिल्म के माध्यम से कश्मीर में हमारे परिवारों से हुए हादसे को देख रहे हैं।-मीनू, कश्मीरी पंडित
फिल्म में कश्मीरी पंडितों की प्रेम कहानी बड़ी सुंदरता से बयां की गई है। इसमें मुख्य किरदारों के बीच का पवित्र प्रेम प्रेरणा स्रोत है। फिल्म हमारे लिए एक नया अनुभव है। जो बातें हम अपने परिवार के बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं, उसे बड़े पर्दे पर देख रहे हैं।-आकाश, कश्मीरी पंडित
फिल्म के माध्यम से कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए हादसे को जानने का मौका मिला। फिल्म में कश्मीर की सुंदरता देखते ही बनती है। काफी अच्छी फिल्म है।-पूनम शर्मा, हिमाचल निवासी