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जम्मू सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाएगा शैव दर्शन

Thu, 07 Nov 2019 03:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंशु शर्मा, जम्मू
अंशु शर्मा, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 07 Nov 2019 03:49 AM IST
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Shaivism will be taught in Jammu Central University
central university jammu - फोटो : Amar Ujala

केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में सेंटर फॉर कंपैरेटिव एंड सिविलाइजेशन की तरफ से शैविज्म में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है। देश भर के कुछेक संस्थानों में ही यह कोर्स चलाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों को जम्मू-कश्मीर के इतिहास के अहम हिस्से शैव दर्शन (भगवान शिव को जनक, पालक और नाशक बताने वाला मत) और भारतीय दर्शन व आध्यात्मिक परपंराओं के बारे में पढ़ाया जाएगा। 

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कोर्स को-आर्डीनेटर अजय कुमार सिंह के मुताबिक यह एक साल का पार्ट टाइम सर्टिफिकेट कोर्स है। दाखिले के लिए कोई आयु सीमा नहीं है। हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध कोर्स की फीस 2400 रुपये है। कोर्स में 25 सीटें हैं, जिसमें से 18 पर दाखिला हो गया है। आरक्षित वर्ग की अधिकतर सीटें खाली हैं।
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हिमालयी क्षेत्रों से शुरू हुआ था शैविज्म 
माना जाता है कि कश्मीर शैविज्म चौथी शताब्दी के आसपास हिमालयी क्षेत्र में शुरू हुआ था। सबसे पहले जम्मू और कश्मीर में शैववाद के बारे में लोगों को जानकारी मिली थी। आमतौर पर इतिहासकार इसे लोकप्रिय बनाने में शंकराचार्य का अहम योगदान मानते हैं। यदि कश्मीरी शैविज्म के ऐतिहासिक विकास को देखें तो हिंदू दर्शन के एक महत्वपूर्ण स्कूल के रूप में अद्वैत के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
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शैविज्म के पहले शिक्षक त्रयंबकादित्य
ऋषि दुर्वासा के शिष्य त्रयंबकादित्य को कश्मीरी शैववाद का पहला शिक्षक माना जाता है। उनके वंशजों ने अगली कई सदियों तक परंपरा को जारी रखा। जम्मू और कश्मीर से ही इसकी परंपरा शुरू हुई थी।

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