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फोरेंसिक लैब में तीन साल से बंद पड़ा है मौतों का राज, 60 से अधिक को चट कर गए चूहे और बिल्लियां

Sun, 01 Dec 2019 02:50 AM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Sun, 01 Dec 2019 02:50 AM IST
सार

  • लापरवाही के कारण हर महीने बन पाती हैं 25 से 30 जांच रिपार्ट  
  • कई विसरा के नमूने खराब हुए, कैदियों की मौत का राज भी बरकरार

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several visara destroyed in forensic labs of jammu kashmir due to carelessness of administration
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में तीन साल से करीब एक हजार मौतों का राज बोतलों में बंद पड़ा है। सरकारी अमले की लापरवाही और स्टाफ की कमी के चलते यहां विसरा की जांच समय पर नहीं हो पा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई सैंपल खराब हो चुके हैं। इतना ही नहीं, लैब में रखे 60-70 विसरा तो चूहे-बिल्लियां चट कर गए हैं।  
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तीन साल पहले शुरू हुई जम्मू संभाग की फोरेंसिक साइंस लैब में केवल एक ही एक्सपर्ट है। एक दिन में एक ही विसरा की जांच हो पाती है। यहां महीने में औसतन 50-55 मामले आते हैं लेकिन समय पर जांच नहीं हो पाने के कारण कई मौतों के कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। लैब से जांच रिपोर्ट में देरी के कारण हत्या के कई मामलों की जांच भी अधूरी है। शराब और विषाक्त पदार्थों के अलावा संदिग्ध मौतों के मामलों में विसरा यहां जांच के लिए भेजे जाते हैं।
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मानक दरकिनार, खुले में रखे जा रहे बिसरा
जम्मू संभाग के दस जिलों से जम्मू फोरेंसिक लैब में हर माह 50-55 मामले जांच के लिए आते हैं। इनमें से 25 से 30 मामलों की जांच रिपोर्ट तैयार हो पाती है। तीन साल में एक हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार बाहर से लाए गए विसरा नमूने सेल्फ पर कपड़े में लपेट कर खुले में रखे गए हैं। मानकों के अनुसार नमूनों को अलमारी में सुरक्षित रखना चाहिए।
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कैदियों की मौत का राज भी बरकरार
हीरानगर और अंबफला जेल में बंद कैदियों की रहस्यमय स्थितियों में मौत के बाद बिसरा रिपोर्ट जांच के लिए लैब में भेजी गई है। अंबफला में काका कबाड़ियां की मौत 14 अक्तूबर और नवंबर के पहले सप्ताह में हीरानगर जेल में एक कैदी की मौत हुई थी। दोनों ही मामलों में अभी तक लैब ने रिपोर्ट नहीं दी है।

45 दिन बाद विसरा हो जाता है खराब
एक हजार मामलों में 800 से ज्यादा नमूने दो साल पुराने हैं। 2019 में अब तक 200 नए मामले आए हैं। सैकड़ों मामले जांच के बिना ही खराब हो गए हैं। फोरेंसिंक एक्सपर्ट अरुण शर्मा का कहना है कि 45 दिन में रिपोर्ट देनी जरूरी होती है। 45 दिन के बाद विसरा खराब हो जाता है।

लैब में एक्सपर्ट स्टाफ की कमी है। एक हजार से ज्यादा मामलों में रिपोर्ट दी जानी है। प्रदेश सरकार और उच्च अधिकारियों को समस्या के बारे में लिखा गया है।- मंसूद सादिक, उपनिदेशक, फोरेंसिंक लैब, जम्मू

लैबों से नमूनों की जांच रिपोर्ट पांच-छह दिन में पहुंचनी चाहिए लेकिन छह माह से साल तक रिपोर्ट का अता-पता ही नहीं होता। कार्यप्रणाली में सुधार जरूरी है।- दिनेश बख्शीश, अधिवक्ता, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

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