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सातवीं आर्थिक जनगणना 2019 की तैयारियां शुरू, एडीडीसी को बनाया गया नोडल ऑफिसर
Mon, 27 May 2019 08:38 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उधमपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उधमपुर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 27 May 2019 08:38 PM IST
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उधमपुर जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से सातवीं आर्थिक जनगणना 2019 के तहत सही आंकड़े जुटाने को लेकर डीसी कार्यालय के कांफ्रेंस हाल में सोमवार केे बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
आर्थिक जनगणना के लिए अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त अशोक कुमार को नोडल आफिसर बनाया गया है। बैठक का आयोजन एडीडीसी के नेतृत्व में ही हुआ। बैठक के दौरान मोबाइल ऐप पर डेटा संग्रह के लिए अपनाई गई कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई है। डीआईओ उधमपुर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि किस प्रकार आर्थिक जनगणना के लिए काम करना है। किस प्रकार आंकड़े जुटाने हैं। किस प्रकार जनगणना के पूरे काम को सुपरवाइज किया जाना है।
अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। एडीडीसी ने जिला स्तरीय समन्वय समिति के सदस्यों को आंकड़े जुटाने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। इस मौके परजिला सूचना अधिकार सज्जाद बशीर सोंबरिया, डीआईओ एनआईसी अनिल कुमार व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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पहली बार पेपरलेस सर्वे
सीएससी-एसपीवी के सीईओ दिनेश त्यागी ने कहा कि यह पहली बार है जब पूरी तरह पेपरलेस आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे सर्वे का काम महज छह माह में पूरा किया जा सकेगा जिसमें अभी तक दो वर्ष का समय लगता है। डाटा जुटाना आसान होने से भविष्य में यह सर्वे हर दो वर्षों पर किया जा सकेगा जो अभी 10 साल में किया जाता है।
प्रति परिवार मिलेंगे 20 रुपये
सर्वे में शामिल गणनाकारों को मेहनताने के रूप में प्रति परिवार 15-20 रुपये दिए जाएंगे। अनुमान है कि सर्वे में देशभर के करीब 20 करोड़ परिवार गणना में शामिल होंगे। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हाल में ही सीएससी ने कुछ माह के भीतर ही आयुष्मान भारत के तहत 14 राज्यों में एक करोड़ पंजीकरण किए थे।
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आर्थिक जनगणना के लिए अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त अशोक कुमार को नोडल आफिसर बनाया गया है। बैठक का आयोजन एडीडीसी के नेतृत्व में ही हुआ। बैठक के दौरान मोबाइल ऐप पर डेटा संग्रह के लिए अपनाई गई कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई है। डीआईओ उधमपुर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि किस प्रकार आर्थिक जनगणना के लिए काम करना है। किस प्रकार आंकड़े जुटाने हैं। किस प्रकार जनगणना के पूरे काम को सुपरवाइज किया जाना है।
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अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। एडीडीसी ने जिला स्तरीय समन्वय समिति के सदस्यों को आंकड़े जुटाने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए। इस मौके परजिला सूचना अधिकार सज्जाद बशीर सोंबरिया, डीआईओ एनआईसी अनिल कुमार व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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पहली बार पेपरलेस सर्वे
सीएससी-एसपीवी के सीईओ दिनेश त्यागी ने कहा कि यह पहली बार है जब पूरी तरह पेपरलेस आर्थिक आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे सर्वे का काम महज छह माह में पूरा किया जा सकेगा जिसमें अभी तक दो वर्ष का समय लगता है। डाटा जुटाना आसान होने से भविष्य में यह सर्वे हर दो वर्षों पर किया जा सकेगा जो अभी 10 साल में किया जाता है।
प्रति परिवार मिलेंगे 20 रुपये
सर्वे में शामिल गणनाकारों को मेहनताने के रूप में प्रति परिवार 15-20 रुपये दिए जाएंगे। अनुमान है कि सर्वे में देशभर के करीब 20 करोड़ परिवार गणना में शामिल होंगे। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हाल में ही सीएससी ने कुछ माह के भीतर ही आयुष्मान भारत के तहत 14 राज्यों में एक करोड़ पंजीकरण किए थे।