2009 बम ब्लास्ट केस में आया बड़ा फैसला
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जम्मू के बहुचर्चित बम विस्फोट मामले में लंबे समय से ट्रायल का सामना कर रहे सात आरोपियों को प्रिंसिपल सेशन जज पुंछ जफर हुसैन बेग की अदालत ने बरी कर दिया।
बरी होने वाले आरोपियों में विलायत खान, अब्दुल अजीज, वजीर मोहम्मद, जाकिर हुसैन, मोहम्मद जमील, मुश्ताक अहमद और मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।
21 अप्रैल 2009 को हुए बम विस्फोट में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।
आईईडी से किया था विस्फोट
पुलिस केस के अनुसार 21 अप्रैल को उन्हें सूचना मिली कि आतंकी अबु अली, अबु किताल, मजीद अली (कोड नाम आर-7), उजाफा सादिक (कोड नाम जेड-2), ओसामा डाक्टर उर्फ इसरार (निवासी पाकिस्तान), फारूक (कोड नाम जुलकुरनैन) और लियाकत (कोड नाम उमर हयात, निवासी डोडा) ने विलायत खान, अब्दुल अजीज व वजीर मोहम्मद के साथ मिलकर तरलवाली रोड पर शाम चार बजे विस्फोट की घटना को अंजाम दिया।
आरोपियों ने आईईडी से जब विस्फोट किया तो वहां से गुजर रही टाटा मोबाइल (जेके12-1795) उसकी चपेट में आ गई, जिससे उसमें सवार कुछ लोगों को मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य बुरी तरह घायल हो गए। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया।
साबित नहीं हो सके आरोप
मामले की सुनवाई करते हुए प्रिंसिपल सेशन जज ने पाया कि घायल और चश्मदीद गवाहों ने अभियोजन की दलीलों को समर्थन नहीं दिया, इसलिए आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला खड़ा नहीं रहता।
अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को भी साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत आरोपियों को बरी करती है।
अदालत ने आतंकी अबु अली, अबु किताल, मजीद अली (कोड नाम आर-7), उजाफा सादिक (कोड नाम जेड-2), ओसामा डाक्टर उर्फ इसरार (निवासी पाकिस्तान), फारूक (कोड नाम जुलकुरनैन) और लियाकत (कोड नाम उमर हयात, निवासी डोडा) के खिलाफ भी वारंट जारी किया।