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जम्मू-कश्मीरः सेहरई ने कहा बेटे से नहीं करूंगा आतंक की राह से लौटने की अपील

Sat, 31 Mar 2018 12:16 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला,श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला,श्रीनगर Updated Sat, 31 Mar 2018 12:16 PM IST
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separatists of jammu and kashmir mohmmad ashraf sehrai speaks about his militant son
sehrai - फोटो : BASIT ZARGAR

ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) के कार्यकारी अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेहरई ने कहा कि वे हिज्म में शामिल अपने बेटे की वापसी की अपील नहीं करेंगे। सहरई ने शु़क्रवार को हुर्रियत(जी) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी की रिहाई के मौके पर कहा कि इतने सालों तक अपनी कौम से दूर रहने के बावजूद युवाओं और अन्य लोगों ने जिस तरीके से उनका स्वागत किया है इससे साफ होता है कि आज भी लोग उन्हें भूले नहीं हैं।

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उन्होंने कहा कि गिलानी की रिहाई को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता कि किस वक्त उन्हें वापस नज़रबंद करने का आदेश आ जाए। हम तब तक गिलानी साहब की रिहाई को आजादी नहीं मानेंगे जब तक हमें अपनी राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फ्री स्पेस नहीं दिया जाता है।
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सहरई ने बेटे जुनैद के हिज्ब में शामिल होने पर कहा कि वो जुमे की निमाज़ पढ़ने गया था उसके बाद वहीं से वो अपनी राह पर निकल गया। डीजीपी ने सेहरई से कहा था कि वे दूसरे युवाओं के साथ अपने बेटे के लौटने की अपील जारी करें।
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उन्होंने कहा कि हमने जब कभी और युवाओं के लिए अपील नहीं की तो आज मैं बेटे के लिए क्यूँ अपील करूं, क्या मेरे बेटे का खून उनसे ज्यादा कीमती है। इसलिए मुझे अपील करने की ज़रुरत नहीं है। सेहरई ने कहा कि वो उसका अपना फैसला था। उन्होंने कहा कि वो पढ़ा लिखा था काफी ज़हीन था और असली ज़हीन वो होता है जो खुदा की राह पर चल सके।

अलगाववादियों को साधने में जुटी सरकार

separatists of jammu and kashmir mohmmad ashraf sehrai speaks about his militant son
KASHMIR SEPARATISTS - फोटो : File Photo

 प्रमुख अलगाववादियों से नजरबंदी हटाने के राज्य सरकार के फैसले को केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा से बातचीत के लिए माहौल तैयार करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अलगाववादी खेमे में सेंध लगाने के लिए ही यह कदम उठाया गया है।

केंद्रीय वार्ताकार की ओर से सरकार के इस कदम का स्वागत किए जाने से भी यह माना जा रहा है कि वार्ताकार अलगाववादी खेमे को इसी बहाने बातचीत के लिए साधने में जुटे हैं। वार्ताकार की पहल पर ही राज्य सरकार ने यह फैसला किया है।   

नजरबंदी हटाने के फैसले से यह माना जा रहा है कि अंदरखाने खिचड़ी पक रही है। पहले भी केंद्रीय वार्ताकार ने अलगाववादियों से बातचीत प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन अब तक इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई थी।

चर्चा रही कि पिछले दिनों अपने दौरे के दौरान वे अलगाववादी प्रो. भट से मुलाकात करने में कामयाब रहे थे, लेकिन अन्य प्रमुख अलगाववादियों से बातचीत करने में सफलता नहीं हासिल हुई थी। उधर, नजरबंदी हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह गिलानी तथा उनकी कंपनी को लोगों से निर्बाध रूप से बातचीत की छूट दे।

सरकार उन्हें बिना किसी व्यवधान के घूमने तथा विचारों को रखने की अनुमति दे। उन्हें अपनी बात रखने में कुछ भी गलत नहीं है, बशर्ते कानून-व्यवस्था की स्थिति न पैदा होने पाए। यह सरकार पर निर्भर है कि वह गिलानी तथा अन्य से कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर कैसे निपटेगी।

एक प्रश्न के जवाब में कहा कि यह हुर्रियत को फैसला करना है कि वह उनसे बात करेगी या नहीं। वह कैसे उन्हें बाध्य कर सकते हैं। यह उन पर निर्भर है कि वे बातचीत के लिए तैयार हों तो सामने आएं। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी संस्तुतियां लागू होंगी तो उन्होंने कहा कि पत्थरबाजों से मुकदमा हटाए जाने का निर्णय लागू हो चुका है। जल्द ही बड़ा बदलाव नजर आएगा। 

गिलानी से आठ साल बाद नजरबंदी हटी है। डीजीपी ने कहा है कि हुर्रियत (जी) प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी, हुर्रियत (एम) प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक तथा जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक अब कहीं भी आने जाने को स्वतंत्र हैं। 

अगर कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानते हुए, यूएन प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए और आत्मनिर्णय के अधिकारी को दायरे में रखते हुए कोई टेबल सजेगा तो हमें कोई एतराज नहीं है। अगर सरकार को लगता है कि रिहाई के बाद गिलानी खामोश हो जाएं और कश्मीर की आजादी को लेकर कोई भाषण न दें तो यह संभव नहीं है। जब तक लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कोई फैसला नहीं होगा तब तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकते।- मो. अशरफ सेहरई, चेयरमैन-तहरीक-ए-हुर्रियत

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