कश्मीरी पत्थरबाजों पर रणनीतिक कार्रवाई की तैयारी, बनाई जाएगी अलग जेल
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जम्मू कश्मीर सरकार पत्थरबाजों के लिए एक अलग जेल बनाने का सोच रही है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि पत्थरबाजों को आम कैदियों और जेल में बंद आतंकियों की संगत से दूर रखना है। सरकार द्वारा इस कोशिश की ओर बढ़ाए गए कदम से राज्य पुलिस के साथ-साथ कानून व्यवस्था से जुड़ी हर एजेंसी इसे काफी उम्मीदें जोड़े हुए है।
उनका मानना है कि यह कदम काफी लाभदायक साबित हो सकता है। दरअसल वर्तमान में राज्य में भद्रवाह, पुलवामा और कारगिल में तीन जेलों का निर्माण चल रहा है, जिनमें से सरकार पुलवामा जेल को विशेष रूप से पत्थरबाजों के लिए रखने पर सोच रही है।
इसके पीछे सरकार का एक मुख्य उद्देश्य है कि पत्थरबाजों को कट्टर अपराधी बनने से रोकना और वह तब हो पाएगा जब उन्हें अलग रख उनकी सोच बदली जा सके। अक्सर देखा गया है कि पत्थरबाज जिन्हें पीएसए के अंतर्गत जेलों में बंद किया जाता है, वह जेल से छूटने के बावजूद पत्थरबाजी करते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि उनके सजा काटने के बाद अब और सजा का डर नहीं है।
कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों के लिए इस किस्म की पहली जेल
कई बार यह भी देखा गया कि यह पत्थरबाज जेल में पहले से बंद कट्टर अपराधियों और आतंकियों की संगत में रह कर और भी खतरनाक अपराधी या कट्टरपंथी सोच लेकर बाहर निकलते हैं। इसलिए सरकार इन पत्थरबाजों के लिए अलग जेल बनाने के प्रयासों में जुट गई है। पुलवामा की यह एक ‘डिटेंशन सेंटर’ के साथ-साथ पत्थरबाजों के लिए ‘रेफोर्मेशन सेंटर’ का काम भी करेंगी। जहां पत्थरबाजों की बाकायदा काउंसिलिंग भी की जाएगी।
हालांकि अभी इसका पूर्ण रूप से फैसला आना बाकी है, लेकिन अगर ऐसा होता है यह कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों के लिए इस किस्म की पहली जेल होगी। जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर घाटी में कानून व्यवस्था को संभालने में सीआरपीएफ भी अहम भूमिका निभाती है। उनका भी मानना है कि यह एक अच्छा कदम होगा सरकार की ओर से। सीआरपीएफ प्रवक्ता राजेश यादव के अनुसार ऐसे प्रयास न सिर्फ सरकार के लिए लाभदायक हैं बल्कि उनके लिए भी लाभदायक होंगे।
सरकार के ऐसे प्रयासों से पथराव की घटनाओं में काफी गिरावट हो सकेगी। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर राज्य में पथराव की घटनाओं में उछाल न सिर्फ सरकार के लिए चिंता का विषय है बल्कि समाज सुधार का काम कर रही जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ-साथ आतंकवाद से लड़ रही सभी सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन रहा है। जिसको कम करने के लिए ऐसे प्रयासों की काफी ज्यादा जरूरत है।
2016 की हिंसा में गिरफ्तार हुए 8500 से ज्यादा पत्थरबाज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में हिज्ब कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद 8,587 लोगों को पत्थरबाजी के आरोप में पकड़ा गया था। जिनमें से 519 जुवेनाईल (किशोर) थे। जबकि 8,473 को इस वर्ष जनवरी के महीने तक रिहा किया गया। इनमें से 3,987 पत्थरबाजों की औसतन आयु 18 से 30 वर्ष के बीच थी।
इसके अलावा आंकड़ों के अनुसार 2,761 लोगों को विभिन्न धाराओं के तहत पकड़ा गया था। जिन में 522 पर पीएसए लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार कुछ समय से देखा जा रहा है कि पत्थरबाजी की घटनाओं में उछाल आ रहा है और जब यह पत्थरबाज बड़ी संख्या में पकड़े जाते हैं तो जेलों में इनको संभालना काफी कठिन हो जाता है।