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हड़ताल के कारण बाजारों में लगे कूड़े के ढेर
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सफाई कर्मी कामछोड हड़ताल पर बाजारों में लगे गंदगी के ढेर
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ज्यौड़ियां। सफाई कर्मचारी यूनियन खौड़ और ज्यौड़ियां के कर्मचारी मांगों को लेकर काम छोड़ हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते खौड़ तथा ज्यौड़ियां बाजार में मंगलवार को कूड़ा नहीं उठाया गया। इस कारण नगर के मुख्य मार्गों और गलियों में कूड़े ढेर लग गए।
ज्यौडियां म्यूनिसिपल कमेटी के सफाई कर्मियों की तरफ से अखिल भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले मांगों को लेकर काम छोड़ हड़ताल जारी कर दी है। मंगलवार को भी सफाई कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। इसका नेतृत्व सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान विजय ने किया। उन्होंने बताया कि 15-15 साल से हम इमानदारी से सेवा दे रहें है, लेकिन सरकार की तरफ से हमें स्थायी करने को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। हमारा वेतन भी नही बढ़ाया जा रहा है। हमें सिर्फ आश्वासन मिलते हैं। जिसको लेकर हमने एक बार फिर सोमवार से हड़ताल का रास्ता अख्तियार किया है।
प्रदर्शन में शामिल कमलेश देवी ने बताया कि हमें मात्र 6700 रुपये मिलते हैं। इस महंगाई के दौर में 6700 रुपये के वेतन में हम खाना खाएं, बच्चों की स्कूल फीस दें, उनकी किताबें लाएं या मकान का किराया दें। इस महंगाई के दौर में हमें पर भूखे मरने की नौबत आ गई है। इसलिए हमारा धरना प्रदर्शन अब तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार हमें स्थायी कर वेतन नहीं बढ़ाती है।
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दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से खौड़ और ज्यौड़ियां कस्बों में गंदगी के ढेर लग गए हैं। इसके चलते स्थानीय लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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सफाई कर्मियों को स्थायी नहीं करने पर काम छोड़ हड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के बैनर तले प्रधान थामस गिल के नेतृत्व में सफाई कर्मियों ने स्थायी करने व लंबित मांगों को पूरा नहीं करने पर काम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी है। मंगलवार को उन्होंने न तो सफाई की और नहीं कूड़ा उठाया।
संघ के प्रधान थॉमस गिल, चेयरमैन अशोक मसीह, उप प्रधान विनय विश्वकर्मा आदि ने कहा कि वह लंबे समय से मांगों को सरकार के समक्ष रखते आ रहे हैं। उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने काम छोड़ हड़ताल पर जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती। पहले भी हड़ताल पर जाने पर झूठे वादों के और कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जो सफाई कर्मचारी सात साल से अस्थायी तौर पर कार्य कर रहे हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्थायी कर उनकी वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। एसआरओ-43 के तहत लंबित मामलों का जल्द निपटारा होना चाहिए। इस मौके पर अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।
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ज्यौडियां म्यूनिसिपल कमेटी के सफाई कर्मियों की तरफ से अखिल भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले मांगों को लेकर काम छोड़ हड़ताल जारी कर दी है। मंगलवार को भी सफाई कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। इसका नेतृत्व सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान विजय ने किया। उन्होंने बताया कि 15-15 साल से हम इमानदारी से सेवा दे रहें है, लेकिन सरकार की तरफ से हमें स्थायी करने को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। हमारा वेतन भी नही बढ़ाया जा रहा है। हमें सिर्फ आश्वासन मिलते हैं। जिसको लेकर हमने एक बार फिर सोमवार से हड़ताल का रास्ता अख्तियार किया है।
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प्रदर्शन में शामिल कमलेश देवी ने बताया कि हमें मात्र 6700 रुपये मिलते हैं। इस महंगाई के दौर में 6700 रुपये के वेतन में हम खाना खाएं, बच्चों की स्कूल फीस दें, उनकी किताबें लाएं या मकान का किराया दें। इस महंगाई के दौर में हमें पर भूखे मरने की नौबत आ गई है। इसलिए हमारा धरना प्रदर्शन अब तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार हमें स्थायी कर वेतन नहीं बढ़ाती है।
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दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से खौड़ और ज्यौड़ियां कस्बों में गंदगी के ढेर लग गए हैं। इसके चलते स्थानीय लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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सफाई कर्मियों को स्थायी नहीं करने पर काम छोड़ हड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के बैनर तले प्रधान थामस गिल के नेतृत्व में सफाई कर्मियों ने स्थायी करने व लंबित मांगों को पूरा नहीं करने पर काम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी है। मंगलवार को उन्होंने न तो सफाई की और नहीं कूड़ा उठाया।
संघ के प्रधान थॉमस गिल, चेयरमैन अशोक मसीह, उप प्रधान विनय विश्वकर्मा आदि ने कहा कि वह लंबे समय से मांगों को सरकार के समक्ष रखते आ रहे हैं। उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने काम छोड़ हड़ताल पर जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती। पहले भी हड़ताल पर जाने पर झूठे वादों के और कुछ नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जो सफाई कर्मचारी सात साल से अस्थायी तौर पर कार्य कर रहे हैं। उन्हें जल्द से जल्द स्थायी कर उनकी वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। एसआरओ-43 के तहत लंबित मामलों का जल्द निपटारा होना चाहिए। इस मौके पर अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।