अपनों को तलाशने का साधन बनीं सोशल साइट्स
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कुदरत की मार झेल रह जन्नत में फंसे लोगों के परिजनों के लिए सोशल साइट्स बड़े काम की साबित हो रहीं हैं। घाटी से सकुशल लौट रहे लोग अपने आप को परिवार के बीच पाकर राहत की सांस ले रहे हैं। घाटी में फंसे लोगों के परिजन अपनों की तलाश में सोशल साइट और मोबाइल एप्स का सहारा ले रहे हैं।
कभी मौज मस्ती तो कभी सेल्फी, स्टेटस अपडेट करने के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली सोशल साइट और मोबाइल एप्स का इस्तेमाल करते थे। आज अनगिनत लोग अपनों की तलाश के लिए इन्हीं साइटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, वाट्स एप्प, वाइबर और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों में ऐसे अनगिनत लोगों की पूरी डिटेल तस्वीरों के साथ देखने को मिल रही है।
इन साइटों और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये लोग घाटी में फंसे लोगों की तस्वीरों को अपलोड कर जानकारी देने की अपील कर रहे हैं। अपनों की तलाश में जुटे लोग कई सारे अखबार और न्यूज चैनलों के वेबसाइटों पर भी तस्वीरें भेजकर उनकी तलाश और राहत पहुंचाने के लिए अपील कर रहे हैं।
इन साइटों का ले रहे हैं सहारा
सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल करने वाली महिला उद्यमी शकुन सेठी ने बताया कि प्रशासन और पीसीआर से जानकारी नहीं मिलने के बाद हताश लोग अपने रिश्तेदारों को तलाशने के लिए इन साइटों का सहारा ले रहे हैं।
सोशल साइट के जरिये अपने भाईयों की तलाश के लिए मदद ले रहे रुप नगर के अजय सिंह और बनतालाब के दर्शन कटोच ने बताया कि उनके भाई पिछले तीन दिन से घाटी में फंसे थे।
उन्होंने बताया कि प्रशासन और हेल्पलाइन से कोई भी जानकारी नहीं मिलने के कारण उन्होंने सोशल साइट का सहारा लिया जिसमें उन्हें घाटी से सकुशल लौटे लोगों से जानकारी मिली है कि वह सही सलामत हैं।