कम की गई कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक की सुरक्षा
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हुर्रियत (एम) प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक की सुरक्षा घटा दी गई है। सुरक्षाकर्मियों की संख्या आधी करते हुए अब उनकी सुरक्षा में 16 के बजाय 8 सुरक्षा कर्मी ही रहेंगे। डिप्टी एसपी मोहम्मद अयूब पंडित की 23 जून को नौहट्टा इलाके के जामिया मस्जिद के बाहर भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या किए जाने के बाद यह फैसला किया गया है।
इस दिन मीरवाइज मस्जिद में तकरीर कर रहे थे। सूत्रों का कहना है कि डिप्टी एसपी की हत्या के छह दिन बाद 29 जून से मीरवाइज की सुरक्षा घटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। इस दिन उनके पीएसओ के रूप में तैनात डीएसपी रैंक के एक अधिकारी को हटा लिया गया और बदले में किसी को नहीं भेजा गया।
मीरवाइज को हिजबुल आतंकियों की ओर से उनके पिता मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक की 1999 में की गई हत्या के बाद जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। हुर्रियत नेता ने सुरक्षा घटाए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि उनसे इस बाबत कभी पूछा नहीं गया।
सरकार पूरी तरह स्वतंत्र है कि वह सुरक्षा में लगाए गए सभी पुलिसकर्मियों को हटा ले। उन्होंने न तो कभी सुरक्षा मांगी थी और न आगे मांगेंगे। जब उनके पिता की षड्यंत्र के तहत हत्या की गई थी तो उनका परिवार कुछ समय के लिए राजोरी कदल शिफ्ट कर गया था। वहां से नगीन स्थित आवास पर लौटने पर पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई।
तब परिवार वालों ने सुरक्षा का विरोध किया तो उनको कहा गया कि सुरक्षा नहीं हटाई जा सकती है। यह उनकी जान की सुरक्षा के खतरे को भांपते हुए सरकार का फैसला है। ज्ञात हो कि डिप्टी एसपी की हत्या पर पूरे देश में बवाल हुआ था। इस मामले में 12 में से पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
सुरक्षा में कमी लाना कोई नई बात नहीं : डीजीपी
डीजीपी डा. एसपी वैद ने बताया कि सुरक्षा में कमी लाना कोई नई बात नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाती है और जैसी भी खतरे की धारणा होती है उसके अनुसार ही सुरक्षा का निर्णय लिया जाता है। कश्मीर रेंज के आईजी मुनीर अहमद खान ने बताया कि मीरवाइज की सुरक्षा में कोई कमी नहीं लाई गई है, सुरक्षा बरकरार है।
यह पूछे जाने पर कि मीरवाइज के साथ तैनात डीएसपी को हटाया गया है और अब सब-इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी इंचार्ज रहेगा तो उन्होंने कहा कि फिलहाल डीएसपी को ट्रांसफर किया गया है। देखेंगे कि क्या दूसरा डीएसपी उसकी जगह भेजा जाएगा या फिर इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी वहां जाएगा। जो भी उचित रहेगा उसे भेजा जाएगा।