J&K: पांपोर हमले के बाद नई रणनीति बनाने में जुटे सुरक्षा बल
- श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर में 20 फरवरी को ईडीआई के बाहर सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के बाद ईडीआई इमारत में भीषण मुठभेड़ चली थी।
- सभी ऐसी इमारतों की रेकी की जा रही है ताकि सुरक्षा एजेंसियों के पास इसका पूरा नक्शा रहे जो हमले को असफल बनाने में लाभदायक सिद्ध हो।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर में 20 फरवरी को ईडीआई के बाहर सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के बाद ईडीआई इमारत में भीषण मुठभेड़ चली थी। इसके बाद कश्मीर में बनी कंकरीट इमारतें सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो गई हैं। कश्मीर के राष्ट्रीय राजमार्ग या अन्य संवेदनशील इलाकों में बनी यह इमारतें चिंता का विषय बनी हुई हैं।
कश्मीर में ऐसी इमारतें जो आतंकी हमलों को अंजाम देने या फिर हमलों के दौरान शरण लेने में प्रयोग में लाई सकती हैं, ऐसी इमारतों की जांच और जायजा सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। सभी ऐसी इमारतों की रेकी की जा रही है ताकि सुरक्षा एजेंसियों के पास इसका पूरा नक्शा रहे जो हमले को असफल बनाने में लाभदायक सिद्ध हो।
कश्मीर की पक्की इमारतों का खाका हो रहा तैयार
सीआरपीएफ के आईजी अतुल करवाल के अनुसार भविष्य के लिए इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की जा रही है। इस बात का भी आकलन किया जा रहा है कि किन जगह से आतंकी सुरक्षा बलों को निशाना बना सकते हैं। आतंकियों के खिलाफ लड़ने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की जाएगी।
श्रीनगर के आसपास की सभी ऐसी इमारतों का पूरा खाका सुरक्षा बलों द्वारा जमा किया जा रहा है। पांपोर हमले को लेकर सुरक्षा बलों ने इस बात को कबूला है कि ईडीआई इमारत की मजबूती सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती साबित हुई थी।
आईजी सीआरपीएफ का यह भी कहना है कि आतंकियों ने सोच समझकर ऐसी इमारत में शरण ली होगी ताकि सुरक्षा बलों को ऑपरेशन को अंजाम देने में मुश्किल हो और मुश्किल आई भी। भविष्य में भी वह ऐसा कर सकते हैं इसकी भी आशंका है।
गौरतलब है कि ईडीआई हमले में सुरक्षा बलों को मुठभेड़ के दौरान काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके दो मुख्य कारण हैं, एक हमले में प्रयोग में लाई गई इमारत की मजबूती और दूसरा इमारत की रेकी नहीं हुई थी।