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जम्मू संभाग में 254 प्राइमरी स्कूलों में नामांकन शून्य
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जम्मू। जम्मू संभाग में 254 प्राइमरी स्कूलों में शून्य नामांकन है यानी कि इन स्कूलों में एक भी बच्चे का दाखिला नहीं हुआ है। बच्चे नहीं होने के चलते स्कूल बंद है। अब सरकार ऐसे स्कूलों की इमारतें उन विभागों को दे रही है, जो किराए के आवास पर चल रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंधी सर्वेक्षण करवाया था।
जम्मू जिलों में सबसे ज्यादा 48 प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें शून्य नामांकन है। डोडा जिले में 22, कठुआ में 30, किश्तवाड़ में 25, पुंछ में 17, राजोरी में 31, रामबन में 9, रियासी में 5, सांबा में 25 और उधमपुर में 33 ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं। कश्मीर संभाग में अनंतनाग और बारामुला में 35 प्राइमरी स्कूलों में नामांकन शून्य है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों में तैनात शिक्षकों का अन्य स्कूलों में तबादला कर दिया है। हालांकि लंबे समय से इन स्कूलों की इमारतों का उपयोग नहीं हो रहा था। विभाग ने कुछ इमारतें ग्रामीण विकास विभाग को दी थीं। अब स्वास्थ्य विभाग भी इन इमारतों का उपयोग स्वास्थ्य केंद्र के रूप में करेगा। किराये के आवास में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों को इन स्कूलों की इमारतों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे सरकार का राजस्व बचेगा।
कम नामांकन वाले स्कूलों को किया जा रहा समायोजित
शून्य नामांकन वाले स्कूलों को शिक्षा विभाग बंद कर रहा है। इसके साथ ही 15 से कम नामांकन वाले स्कूलों को समायोजित किया जा रहा है। सरकार ने 2000 हजार स्कूलों को चिह्नित किया है। इसमें से सात सौ स्कूलों को समायोजित किया जा रहा है। शेष स्कूलों को समायोजित करने की प्रक्रिया जारी है।
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जम्मू जिलों में सबसे ज्यादा 48 प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें शून्य नामांकन है। डोडा जिले में 22, कठुआ में 30, किश्तवाड़ में 25, पुंछ में 17, राजोरी में 31, रामबन में 9, रियासी में 5, सांबा में 25 और उधमपुर में 33 ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं। कश्मीर संभाग में अनंतनाग और बारामुला में 35 प्राइमरी स्कूलों में नामांकन शून्य है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों में तैनात शिक्षकों का अन्य स्कूलों में तबादला कर दिया है। हालांकि लंबे समय से इन स्कूलों की इमारतों का उपयोग नहीं हो रहा था। विभाग ने कुछ इमारतें ग्रामीण विकास विभाग को दी थीं। अब स्वास्थ्य विभाग भी इन इमारतों का उपयोग स्वास्थ्य केंद्र के रूप में करेगा। किराये के आवास में चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों को इन स्कूलों की इमारतों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे सरकार का राजस्व बचेगा।
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कम नामांकन वाले स्कूलों को किया जा रहा समायोजित
शून्य नामांकन वाले स्कूलों को शिक्षा विभाग बंद कर रहा है। इसके साथ ही 15 से कम नामांकन वाले स्कूलों को समायोजित किया जा रहा है। सरकार ने 2000 हजार स्कूलों को चिह्नित किया है। इसमें से सात सौ स्कूलों को समायोजित किया जा रहा है। शेष स्कूलों को समायोजित करने की प्रक्रिया जारी है।
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