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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   SC seeks report from Jammu and Kashmir Police on youth's killing

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी कश्मीरी युवक की मौत पर रिपोर्ट 

Wed, 10 Aug 2016 10:52 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 10 Aug 2016 10:52 AM IST
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SC seeks report from Jammu and Kashmir Police on youth's killing
- फोटो : PTI

कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी की हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे 26 साल के एक युवक की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस से रिपोर्ट मांगी है कि किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। श्रीनगर के तेंगपुरा में 10 जुलाई को हुई इस घटना की जांच कर 12 अगस्त तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि रिपोर्ट दाखिल करने के बाद हम देखेंगे कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की दरकार है या नहीं? मजिस्ट्रेट ने डीएसपी यासिर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति पीसी घोष की अध्यक्षता वाली पीठ ने कश्मीर रेंज के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। 
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पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करने के आरोप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर रेंज) पर यह अवमानना कार्रवाई की गई थी जबकि कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के अलावा पुलिस उपमहानिरीक्षक पर भी शाबिर अहमद मीर नामक युवक की हत्या का आरोप था। 
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शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की दलील पर मीर के पिता को भी नोटिस जारी किया। मीर के पिता ने कश्मीर के मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करते हुए  डीएसपी कादरी और अन्य पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया था कि उनके बेटे को घर के अंदर रहते मारा गया था।

एफआईआर दर्ज करना ही आपके हित में

SC seeks report from Jammu and Kashmir Police on youth's killing

जम्मू एवं कश्मीर सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ के समक्ष कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश सही नहीं है क्योंकि पुलिस ने हिंसक और बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की थी।

उन्होंने कहा कि ऐसा हुआ तो हर दिन इस तरह का मामला दर्ज करना होगा। पीठ ने कहा आप एफआईआर दर्ज कीजिए और फिर जांच कीजिए। पीठ ने कहा कि आपके लिए यही सबसे अच्छा होगा। जवाब में अटार्नी जनरल ने कहा कि शिकायत पूरी तरह से फर्जी है।

उन्होंने कहा कि अगर हम डीएसपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करेंगे तो हमें डीएसपी को निलंबित करना होगा और गिरफ्तार करना होगा। इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा जरूरी तो नहीं है। तब अटार्नी जनरल ने कहा कि यह जरूरी होता है। अटार्नी जनरल ने कहा कि गिरफ्तारी पर शुक्रवार तक की रोक लगाई जाए।

शुक्रवार तक मांगी मामले की रिपोर्ट 

SC seeks report from Jammu and Kashmir Police on youth's killing
सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि दो अलग-अलग वारदात हैं। हमें नहीं पता कि इनमें से कौन सच है। मुख्य बात है कि एक युवक की मौत हुई है। जवाब में अटॉनी जनरल ने कहा कि पहले ही एक एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। ऐसे में अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत क्या है।

पहली एफआईआर में जांच के दौरान अगर पाया गया कि पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। उन्होंने उदाहरण के तौर पर संदीप घड़ोली एनकाउंटर मामले का जिक्र किया जिसमें गुड़गांव पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बाद में मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद पीठ ने राज्य सरकार को इस पूरे प्रकरण की जांच कर शुक्रवार तक सीलबंद लिफाफ में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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