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आपदा को अवसर में बदलने वाले योद्धाओं को सलाम, दूसरों के लिए बने मिसाल

Mon, 03 Aug 2020 06:23 PM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार / दीपक कापड़ी, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू / देहरादून
अरुण कुमार / दीपक कापड़ी, अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू / देहरादून Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 03 Aug 2020 06:23 PM IST
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Salute to warriors who turn disaster into opportunity, set example for others
आपदा को अवसर में बदलने वाले योद्धाओं को सलाम - फोटो : अमर उजाला

फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी।

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आपदा को अवसर में बदला...संक्रमण और सोशल डिस्टेंसिंग के इस दौर में जहां आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ी हैं, वहीं जम्मू के सरवाल की महिला ने राखियां बनाकर होम डिलीवरी शुरू कर दी। इसमें सोशल मीडिया का सहारा लिया। वहीं पिथौरागढ़ में दो सगे भाइयों ने कैरी बैग बनाकर न केवल एक लाख मुनाफा कमाना शुरू कर दिया, बल्कि सात-आठ लोगों को रोजगार भी दिया। संकट की घड़ी में इसे कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना।

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Salute to warriors who turn disaster into opportunity, set example for others
उद्यमी नीरज शर्मा - फोटो : अमर उजाला

...राखियां बनाकर की होम डिलीवरी 
इस बार बाजार में तरह-तरह की राखियां उपलब्ध नहीं। चीन की राखियों का भी बाजार पर कब्जा नहीं और लोगों की नाराजगी सो जम्मू के सरवाल क्षेत्र की महिलाएं घर पर ही राखियां तैयार कर घरों में आपूर्ति कर रही हैं। उद्यमी नीरज शर्मा की राखियां लोगों को खूब भा रही हैं। नीरज के पास अच्छी मांग है। वे अपने घर के आसपास के पांच किलोमीटर दायरे में राखियां लोगों तक पहुंचा रही हैं। ऑर्डर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आता है।

नीरज ने बताया कि इस बार कोरोना संक्रमण और चीनी सामान के बहिष्कार को ध्यान में रखते हुए राखियों की होम डिलीवरी पर काम किया जिसे जबरदस्त रिस्पांस मिला है। उन्होंने कहा कि जम्मू शहर में वीकेंड लॉकडाउन है। आस-पड़ोस और रिश्तेदारों में भी राखियों की खरीदारी को लेकर परेशानी थी। ऐसे में राखियां बनाकर होम डिलीवरी की।

डिजाइनर और गणेशजी वाली राखी की खास मांग 
साधारण धागे से लेकर डिजाइनर राखी की अच्छी खासी रेंज है। डिजाइनिंग राखियों में गणेश भगवान का प्रतिबिंब बना हुआ है, जो लोगों की पहली पसंद है।

Salute to warriors who turn disaster into opportunity, set example for others
कमल पंत - फोटो : अमर उजाला

...कैरी बैग बनाकर लखपति बने

पुरानी कहावत है कि पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम नहीं आती है, पानी मैदानी क्षेत्रों में बह जाता है और जवानी भी मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन कर जाती है। पर पिथौरागढ बेड़ीनाग विकासखंड के दो सगे भाइयों ने इस कहावत को झूठा साबित कर दिया। वह पहाड़ भी लौटे और रोजगार भी जमाया।

हिमांशु और कमल पंत ने कैरीबैग उद्योग लगाया। सगे भाई हर महीने सात से आठ लाख रुपये का टर्नओवर करते हैं। सात से आठ लोगों को छह से 15 हजार रुपये पगार भी दे रहे हैं। इससे उन्हें हर महीने करीब एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ भी हो रहा है। दोनों भाई पहाड़ छोड़कर मैदानी क्षेत्र की ओर नौकरी करने गए फिर गांव लौटकर दोनों भाइयों ने पीपीली में कैरीबैग उद्योग लगाया है। जिला ग्रामाद्योग के सहयोग से 25 लाख रुपये का ऋण लिया। उनका यह स्टार्ट अप अब पटरी पर  है।

हिमाचल से मंगाते रहे हैं फेब्रिक 
बेड़ीनाग में कैरीबैग निर्माण के लिए हिमाचल से फेब्रिक मंगा कर कैरीबैग का निर्माण करते हैं। ये कैरीबैग बाजार में ग्रीन हिमालया  के नाम से उपलब्ध है। जो प्रदूषण नहीं फैलाते हैं। इनकी मांग बढ़ती जा रही है।

(फेसबुक ने इस श्रृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)

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