जम्मू-कश्मीरः साल दर साल घाटी में मंद पड़ती जा रही केसर की महक, हांफ गया नेशनल सैफरॉन मिशन

सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 07 Oct 2019 12:32 PM IST
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कश्मीरी केसर
कश्मीरी केसर - फोटो : फाइल

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कश्मीर घाटी के पांपोर और किश्तवाड़ में 32 हेक्टेयर भूमि में उगने वाले केसर का उत्पादन साल दर साल गिरता जा रहा है। जो पैदावार 25 हजार किलोग्राम तक निकलनी चाहिए वह मौजूदा समय में पांच से छह हजार किलोग्राम के बीच ही रह गई है। इससे विदेशों में दो से तीन हजार किलोग्राम केसर ही सप्लाई हो रहा है। इससे करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है।
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2011 से लेकर 2016 तक केसर का कुल उत्पादन 8 हजार किलोग्राम से घटकर 4 हजार किलोग्राम रह गया था। वर्ष 2017 और 18 में उत्पादन 6200 से 6500 किलोग्राम तक रहा है। इससे पहले साल दर साल उत्पादन में कमी आई है। हर साल ईरान, स्पेन, इस्राइल और जापान में कश्मीर के केसर की डिमांड ज्यादा रहती है।
यहां से हर साल दो से तीन हजार किलोग्राम के आसपास केसर विदेशों में सप्लाई किया जाता है। इसका निर्यात एग्रीकल्चर प्रोसेसिंग फूड डेवलपमेंट अथॉरिटी के माध्यम से किया जाता है। इसकी एवज में विदेशों से 60 करोड़ से 90 करोड़ के आसपास व्यापार किसान करते हैं।
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नेशनल सैफरॉन मिशन भी हांफ गया, नहीं मिला फायदा

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