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बाहु फोर्ट का नाम बदलने की साजिश पर बवाल
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:41 PM IST
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बाहू फोर्ट
- फोटो : File Photo
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बाहु फोर्ट का नाम बदलकर एक टेंडर में शाहाबाद किए जाने की साजिश पर रियासत में बवाल शुरू हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर लोग विरोध में आ गए। कांग्रेस, पैंथर्स सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने भी इसे गंभीर खतरा बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। सूत्रों के अनुसार लोगों का विरोध प्रदर्शन शुरू होते ही सरकार ने हरकत में आते हुए टेंडर रद कर दिया।
पर्यटन राज्यमंत्री प्रिया सेठी का कहना है कि बाहु फोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट की किसी भी बैठक में शाहाबाद नाम का जिक्र नहीं हुआ है। बाहु फोर्ट की अपनी पहचान है। प्रोजेक्ट का नाम पीरखो-महामाया-बाहु फोर्ट रोपवे है।
दरअसल विवाद की जड़ केबल कार कारपोरेशन की ओर से बाहु फोर्ट की चहारदीवारी निर्माण संबंधी टेंडर जारी किया जाना है। इसमें इसे शाहाबाद के रूप में दर्शाया गया है। विज्ञापन जारी होते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। फोर्ट को शाहाबाद कहने पर लोगों ने सोशल नेटवर्क साइट फेसबुक और व्हाट्सएप पर सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
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सरकार को चेतावनी दी गई कि जम्मू की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बाहु फोर्ट का नाम बदलकर जम्मू की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है, जिसका बहुत बुरा परिणाम होगा। भाजपा की एक महिला नेता ने भी सोशल साइट फेसबुक पर किसी को फेसबुक लाइव में कहा कि इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जम्मू की संस्कृति से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
बाहु फोर्ट में स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। लोगों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ तो इसका परिणाम बहुत गंभीर होगा। कांग्रेस ने इसे जम्मू की जनता के साथ साजिश करार देते हुए सख्त एतराज जताया है।
पार्टी प्रवक्ता रवींद्र शर्मा का कहना है कि पहले कश्मीर में शंकराचार्य और हरि पर्वत का नाम बदलने की साजिश की गई और अब जम्मू में इस प्रकार की कोशिशें हो रही हैं। वह भी तब जब भाजपा सरकार में है जो धार्मिक आस्थाओं तथा संस्कृति की रक्षा की बात करती है।
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पर्यटन राज्यमंत्री प्रिया सेठी का कहना है कि बाहु फोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट की किसी भी बैठक में शाहाबाद नाम का जिक्र नहीं हुआ है। बाहु फोर्ट की अपनी पहचान है। प्रोजेक्ट का नाम पीरखो-महामाया-बाहु फोर्ट रोपवे है।
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दरअसल विवाद की जड़ केबल कार कारपोरेशन की ओर से बाहु फोर्ट की चहारदीवारी निर्माण संबंधी टेंडर जारी किया जाना है। इसमें इसे शाहाबाद के रूप में दर्शाया गया है। विज्ञापन जारी होते ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। फोर्ट को शाहाबाद कहने पर लोगों ने सोशल नेटवर्क साइट फेसबुक और व्हाट्सएप पर सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
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सरकार को चेतावनी दी गई कि जम्मू की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बाहु फोर्ट का नाम बदलकर जम्मू की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है, जिसका बहुत बुरा परिणाम होगा। भाजपा की एक महिला नेता ने भी सोशल साइट फेसबुक पर किसी को फेसबुक लाइव में कहा कि इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जम्मू की संस्कृति से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
बाहु फोर्ट में स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। लोगों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ तो इसका परिणाम बहुत गंभीर होगा। कांग्रेस ने इसे जम्मू की जनता के साथ साजिश करार देते हुए सख्त एतराज जताया है।
पार्टी प्रवक्ता रवींद्र शर्मा का कहना है कि पहले कश्मीर में शंकराचार्य और हरि पर्वत का नाम बदलने की साजिश की गई और अब जम्मू में इस प्रकार की कोशिशें हो रही हैं। वह भी तब जब भाजपा सरकार में है जो धार्मिक आस्थाओं तथा संस्कृति की रक्षा की बात करती है।