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जम्मू कश्मीर: प्रदेश में आरएसएस अपनी गतिविधियों का करेगा विस्तार, रोजगार सृजन पर रहेगा फोकस
Sat, 19 Mar 2022 06:06 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sat, 19 Mar 2022 06:06 PM IST
सार
कर्णावती बैठक में राष्ट्रीय महत्व का प्रस्ताव पारित किया गया है। यह भारत को स्वावलंबी बनाने के लिए कार्यों के अवसर बढ़ाने से संबंधित है। रोजगार सृजन से भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत बनाया जाएगा।
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डॉ. गौतम मैंगी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी गतिविधियों का विस्तार करेगा। अगले दो वर्ष में जम्मू कश्मीर समेत पूरे देश में सभी मंडलों में शाखाएं शुरू की जाएंगी। संघ में युवाओं की अधिक भागीदारी बढ़ाई जाएगी। रोजगार की चुनौती को देखते हुए देशभर में रोजगार सृजन के भारत केंद्रित प्रतिमान (माडल) पर काम किया जाएगा।
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संघ के प्रांत संघचालक डॉ. गौतम मैंगी ने केशव भवन में शनिवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए कर्णावती (गुजरात) में हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक की जानकारी दी। देश के विकास के लिए समाज को एकजुट होकर प्रयास करने पर जोर दिया गया है। इस साल जनवरी से मार्च तक ढाई माह में ही 19,048 लोग संघ से जुड़े हैं। संघ की वेबसाइट के ज्वाइन आरएसएस लिंक से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं। युवाओं से विस्तारक के रूप में एक या दो साल का समय लिया जा रहा है।
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जम्मू कश्मीर प्रांत के 281 स्थानों पर 417 शाखाएं चल रही हैं। प्रदेश में संघ की दृष्टि से 30 जिले और 7 विभाग हैं। प्रांत में 117 खंड, 635 मंडल और 42 नगर हैं। साप्ताहिक मिलन 281 स्थानों पर प्रांत में चल रहे हैं। कर्णावती बैठक में राष्ट्रीय महत्व का प्रस्ताव भी पारित किया गया। यह भारत को स्वावलंबी बनाने के लिए कार्यों के अवसर बढ़ाने से संबंधित था। रोजगार सृजन से भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत बनाया जाएगा। बैठक में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करेगा। भारत के हिंदू समाज संस्कृति, इतिहास और यहां की जीवन पद्धति के बारे में एक सही चित्र को समाज के सामने पेश किया जाएगा। भारत के बारे में अज्ञानता व भ्रांतियां फैलाने का षड्यंत्र लंबे समय से किया जा रहा है। इस वैचारिक विमर्श को बदलकर तथ्यों पर आधारित भारत बोध के सही चेहरे को आगे बढ़ाना है।
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