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केंद्र की जानकारी में नहीं थी मसर्रत की रिहाई: मोदी

Mon, 09 Mar 2015 01:05 PM IST
Updated Mon, 09 Mar 2015 01:05 PM IST
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row over masarat alams release

अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के मसले पर पीएम मोदी ने कहा, जम्मू-कश्मीर में जो कछ भी हो रहा है उसकी जानकारी केंद्र सरकार को नहीं है। उन्होंने कहा, आतंकवाद पर दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए, हम वो लोग हैं जिन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को इन्हीं विषयों पर बलि किया है, ऐसी हरकत स्वीकार नहीं की जाएगी।

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विरोधियों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, कृपया हमें देशभक्ति न सिखाएं। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, मैं यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आएगी, हमारी सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। विपक्ष ने सरकार से पीडीपी-भाजपा साझा सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग की है।
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कांग्रेस पार्टी ने रियासत के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के इस फैसले के खिलाफ संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। वहीं मुफ्ती समेत भाजपा और पीएम मोदी पर हमले भी तेज हो गए हैं। रियासत की पैंथर्स पार्टी के नेता भीम सिंह का कहना है कि अगर भाजपा को मुफ्ती का फैसला गलत लग रहा है और वह इसका विरोध करती है तो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लें।
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मुफ्ती पर वार करते हुए सिंह ने कहा, मुफ्ती रियासत के दूसरे शेख अब्दुल्ला बनना चाहते हैं। वहीं मुस्लिम धर्मगुरू खालिद महाली ने भी फैसले को गलत बताते हुए सरकार से अपील की है कि सरकार फैसले पर फिर से विचार करे यह भारत विरोधी फैसला है। उन्होंने कहा, अगर किसी ने गलत किया है तो उसे कानून सजा मिलनी चाहिए।


संसद में मसर्रत आलम की रिहाई पर जमकर बवाल हो रहा है। जम्मू में भी मसर्रत आलम की रिहाई के विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, पीडीपी नेता फिरदौस का कहना है कि, मसर्रत आलम की रिहाई कानून के अनुसार हुई है इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

केंद्र ने आलम पर मांगी रिपोर्ट

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कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई से उपजे सियासी तूफान के बीच केंद्र ने जम्मू-कश्मीर सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार से पूछा है कि किन परिस्थितियों में मसर्रत को रिहा किया गया। मसर्रत की रिहाई के फैसले से गठबंधन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।

इधर कुंआ उधर खाई वाली स्थिति में फंसी भाजपा ने रविवार को आपात बैठक कर पीडीपी पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम की हद से बाहर जाकर फैसला लेने का आरोप लगाया। वहीं, पीडीपी ने कहा है कि मसर्रत की रिहाई न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने भी मसर्रत की रिहाई को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला, वहीं पैंथर्स पार्टी ने रविवार और सोमवार को जम्मू बंद का आह्वान किया।

रविवार को जम्मू में विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि मसर्रत को फिर से गिरफ्तार किया जाए और इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री मुफ्ती जनता से माफी मांगें। रविवार को अवकाश होने के बावजूद दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन के अधिकारियों ने बैठकर इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगने की कार्रवाई पूरी की।

सूत्रों के मुताबिक 2010 में घाटी में पथराव और हिंसा के मुख्य आरोपी मसर्रत के खिलाफ 15 मामले लंबित हैं। उस पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

बीजेपी ने पीडीपी को दी चेतावनी

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सूत्रों ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह सचिव एलसी गोयल ने राज्य के पुलिस महानिदेशक के. राजेंद्र से बात कर मसर्रत की रिहाई के कारणों के बारे में पूछा है। इस सबके बीच मसर्रत ने भी हुर्रियत की गतिविधियां तेज किए जाने का संकेत दिया है। उसने कहा कि सरकार ने उसे रिहा कर कोई अहसान नहीं किया है। उसकी रिहाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है।

संबंधित अदालतों से भी उसे जमानत दे दी गई थी। पहले पाकिस्तान का गुणगान, फिर अफजल और अब मसर्रत की रिहाई को लेकर विपक्ष के साथ-साथ अपनों के निशाने पर आई भाजपा ने पीडीपी को चेतावनी दी है कि अगर राज्य में साझा सरकार चलानी है तो उसे गठबंधन धर्म निभाना होगा।

उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने श्रीनगर में कहा कि इस मामले में पीडीपी से विरोध जताया जाएगा। हालांकि, गंठबंधन पर उनका कहना था कि इस संबंध में फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेना है। उधर, पीडीपी अपने रुख पर अड़ी है। पार्टी के प्रवक्ता एवं शिक्षा मंत्री नईम अख्तर का कहना है कि मसर्रत को रिहा कर पीडीपी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन नहीं किया है।

उनका कहना है कि साझा कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया है कि कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं से वार्ता की जाएगी। नईम अख्तर का कहना था कि किसी को जेल में बंद रखकर उसे वार्ता में शामिल नहीं किया जा सकता।

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