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रोशनी एक्ट घोटाला: नेकां, पीडीपी व कांग्रेस के कई नेताओं ने कब्जाई जमीन, जारी की गई 868 लोगों की पहली सूची

Tue, 24 Nov 2020 11:47 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 24 Nov 2020 11:47 AM IST
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Roshni act scam first list of accused issued includes many NC PDP and congress leaders name
सांकेतिक तस्वीर
जम्मू-कश्मीर में 25 हजार करोड़ रुपये के रोशनी भूमि घोटाले में शामिल प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने शुरू हो गए हैं। जम्मू और कश्मीर दोनों संभाग के मंडलायुक्त की ओर से सोमवार को इसमें शामिल लोगों की पहली सूची जारी की गई। 
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इसमें नेशनल कांन्फ्रेंस, पीडीपी व कांग्रेस के चार पूर्व मंत्री-विधायक, प्रमुख कारोबारी, होटल व्यवसायी, सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। रोशनी एक्ट से बाहर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के भी नाम उजागर किए गए हैं। 
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868 लोगों की सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। सूची में पूर्व मंत्रियों व विधायकों के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों के भी नाम हैं। 
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पूर्व मंत्री हसीब द्राबू व कारोबारी मुश्ताक चाया के भी नाम
कश्मीर संभाग से पीडीपी के पूर्व वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू, उनकी माता शहजादा बानू, द्राबू के भाई इफ्तिखार अहमद व एजाज हुसैन द्राबू, कांग्रेस नेता व प्रमुख कारोबारी केके अमला व उनके परिवार की रचना अमला, वीणा अमला व फकीर चंद अमला, होटल व्यवसायी मुश्ताक अहमद चाया, मुख्य सचिव स्तर के सेवानिवृत्त आईएएस मोहम्मद शफी पंडित व पत्नी निगत पंडित व सैय्यद मुज्जफर अगा के नाम शामिल हैं। 

जम्मू संभाग में सरकारी कर्मचारी व कारोबारी नारू राम, बेली राम, शालू राम, राम दास व रामलाल के नाम बाहु व चौआदी में 38 कनाल पांच मरला जमीन है। इसके साथ ही पूर्व विधायक सतपाल लखोत्रा के परिवार से बुआ दित्ता, देवी दित्ता, रामलाल व सतपाल के नाम बी बाहु व चौआदी में जमीन है। सेवानिवृत्त एसपी मणि राम का नाम भी सूची में है।  

 

जेके बैंक के पूर्व चेयरमैन व पूर्व एडवोकेट जनरल का भी सरकारी भूमि पर कब्जा

जम्मू संभाग में रोशनी एक्ट से बाहर भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं। इनका जमीन पर कब्जा तो है लेकिन राजस्व रिकार्ड में यह दर्ज नहीं है। 

इसमें कांग्रेस के पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी व नेकां के पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू, तनवीर किचलू व अन्य के नाम हैं। नेकां नेता सैय्यद आखून की बाहु व सुंजुवां, जेके बैंक के पूर्व चेयरमैन एमवाई खान की बाहु व सुजुवां, नेकां के पूर्व नेता व पूर्व एडवोकेट जनरल असलम गोनी, नेकां नेता हारून चौधरी का भी बाहु व सुजुवां में सरकारी भूमि पर कब्जा है। 

कोर्ट के आदेश पर सूची वेबसाइट पर
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर रोशनी एक्ट के लाभार्थियों की सूची को सार्वजनिक किया गया है। इसके तहत कश्मीर संभाग के 35 लोगों की सूची जारी हुई है। जम्मू संभाग में 444 (जम्मू पश्चिम-15, बाहु-10 व खौड़-419) के नाम हैं। 

इसके अलावा सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले 389 लोगों का भी नाम सार्वजनिक किया गया है। इनमें छह लोगों का कब्जा सरकारी भूमि पर तो है, लेकिन वह राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले 383 लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। 

जम्मू-कश्मीर में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से जमीन कब्जाने के मामले में सीबीआई ने 16 अक्तूबर को तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। जम्मू व सांबा से ये सभी मामले जुड़े हैं। जम्मू में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कुछ अयोग्य व्यक्तियों को गलत तरीके से राज्य की जमीन का स्वामित्व अधिकार सौंप दिया था। 

दूसरा मामला गांधीनगर के एक कारोबारी और जम्मू विकास प्राधिकरण के राजस्व विभाग के अज्ञात अधिकारियों से जुड़ा है। इसमें दीली गांव की जमीन का स्वामित्व अधिकार उसे सौंप दिया। तीसरा मामला सांबा जिले की जमीन से जुड़ा है जिसमें राजस्व अधिकारियों ने रोशनी अधिनियम के प्रावधानों का जान-बूझकर उल्लंघन करते हुए राज्य की जमीन पर अवैध कब्जा कराया। इनका राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं था।

 

यह है रोशनी एक्ट

राज्य के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 2001 में रोशनी एक्ट लाया। इसके तहत सरकारी भूमि पर अवैध रूप से काबिज लोगों को मालिकाना हक देने की योजना थी। इससे प्राप्त होने वाली धनराशि का उपयोग हाइड्रो प्रोजेक्ट में किया जाना था। 

इस एक्ट के तहत 25 हजार करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का आकलन किया गया था। सीएजी ने कुछ मामलों की जांच में पाया कि 325 करोड़ रुपये की जमीन मात्र 76 करोड़ रुपये में ही आवंटित कर दी गई। मार्केट दर से 80 प्रतिशत कम राशि पर जमीन आवंटित करने का भी पता चला। 

यह भी पता चला कि लोगों ने दूसरे के नाम भी जमीन कर दी है। रोशनी एक्ट के तहत 20.55 लाख कनाल (102750 हेक्टेयर) सरकारी जमीन लोगों को औने पौने दाम में आवंटित कर दी गई।
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