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J&K: मुंबई से आई थीं घूमने, यहीं की होकर रह गईं, अब गुलमर्ग में पर्यटकों को स्कीइंग सिखा रहीं रितिका
Thu, 23 Feb 2023 02:40 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Thu, 23 Feb 2023 02:40 PM IST
सार
रितिका गर्ग कश्मीर की अपनी एक छोटी सी यात्रा से पहले एक बहुराष्ट्रीय बैंक के साथ काम कर रही थीं। वो लाखों में वेतन प्राप्त कर रही थीं। एक बार यहां आने पर उन्होंने हमेशा के लिए यहां का होकर रहने का फैसला कर लिया।
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रितिका
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुंबई की 29 वर्षीय चार्टर्ड एकाउंटेंट रितिका गर्ग को कश्मीर की सुंदरता ने ऐसा आकर्षित किया कि वह यहीं की होकर रह गईं। 2021 के अंत में बहुराष्ट्रीय बैंक की नौकरी छोड़कर रितिका कश्मीर आई थीं। अब वह सवा साल से गुलमर्ग में रह रही हैं। उन्होंने 'हाई-ऑन-ट्रिप्स' के नाम से एक छोटी ट्रैवल कंपनी शुरू की है। वह पर्यटकों को स्कीइंग सिखा रही हैं।
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रितिका गर्ग कश्मीर की अपनी एक छोटी सी यात्रा से पहले एक बहुराष्ट्रीय बैंक के साथ काम कर रही थीं। वो लाखों में वेतन प्राप्त कर रही थीं। एक बार यहां आने पर उन्होंने हमेशा के लिए यहां का होकर रहने का फैसला कर लिया। साथ ही कुछ ऐसा करने की ठान ली जिससे वह बाकी महिलाओं के सपनों को पूरा कर सकें।
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रितिका ने कहा, दोस्तों और परिवार की सलाह के खिलाफ और कश्मीर पर नकारात्मक मीडिया रिपोर्ट के कारण मेरे दिल में डर था, लेकिन मैंने वर्ष 2021 के अंत में एक सप्ताह के लिए कश्मीर आने का फैसला किया और सीधे छह महीने कश्मीर में रही। इस दौरान स्थानीय लोगों के आगंतुकों के अनुकूल स्वभाव से उत्साहित रितिका ने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और स्थायी रूप से कश्मीर आ गई। इसके बाद उन्होंने ''हाई-ऑन-ट्रिप्स'' के नाम से एक छोटी ट्रैवल कंपनी शुरू की, जो केवल महिला यात्रियों की हर जरूरत को पूरा करती है। उन्होंने कहा, कश्मीर का सबसे अच्छा हिस्सा प्राकृतिक नज़ारे या बर्फ नहीं है बल्कि यहां के लोग हैं और मैंने पाया कि यह देश में सबसे सुरक्षित जगह है।
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वर्तमान में रितिका एक पेशेवर स्कीयर के तौर पर गुलमर्ग की स्लोप्स पर बर्फ का लुत्फ़ ले रही हैं और महिला पर्यटकों को भी सिखा रही हैं। यहां तक कि उन्होंने हाल ही में गुलमर्ग में आयोजित खेलो इंडिया विंटर गेम्स के तीसरे संस्करण में भी भाग लिया था। रितिका ने कहा, पिछले दो वर्षों में मैंने 35 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें ज्यादातर 18-35 आयु वर्ग की एकल यात्री हैं और मुझे न केवल इस सीज़न के लिए बल्कि अगले सीज़न के लिए भी बुकिंग मिली है। देश भर की महिलाएं अकेले यात्रा करने को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन थोड़ा सा सपोर्ट चाहिए जो मैं उन्हें मुहैया करा रही हूं।
रितिका ने कहा, मैं एक अनिच्छुक और मजबूर पर्यटक के रूप में कश्मीर आई थी, लेकिन अब कश्मीर मेरा घर है। कश्मीर सबसे सुरक्षित जगह है जहां एक महिला आधी रात में भी अपने जीवन और सम्मान की परवाह किए बिना अकेले यात्रा कर सकती है। अगर मीडिया रिपोर्ट्स न होती तो मैं 2015 में ही कश्मीर आ गई होती। रितिका के अनुसार वह खुद पहले कश्मीर आने से बहुत डरती थी, लेकिन अब वो यहां से नहीं जाना चाहती। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पारंपरिक पर्यटन विभिन्न कारणों से नई चुनौतियों और नुकसान का सामना कर रहा है।
रितिका के महिला केंद्रित स्की पर्यटन के नए विचार ने महिला यात्रियों के साथ सही तालमेल बिठाया है। उनका कहना है कि अब यह मेरा घर है, मैं अब अपने पुराने घर में वापस नहीं जाना चाहती। मैं यहां हमेशा के लिए यहीं रहूंगी। बता दें कि रितिका न केवल महिलाओं को यहां आने के लिए आमंत्रित कर रही हैं बल्कि उन महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं जो ''स्टार्ट-अप'' की शुरुआत करना चाहती हैं।