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Jammu News: जब्त 60 हजार रुपये, आधार कार्ड और दो फोन लौटाएंं
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी के कब्जे से बरामद 60,600 रुपये नकद, आधार कार्ड और दो मोबाइल फोन सुपुर्दनामा पर लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इन वस्तुओं को लंबे समय तक पुलिस अभिरक्षा में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत में दायर आवेदन के अनुसार, आरोपी इकरा जान की ओर से पुलिस थाना विजयपुर में दर्ज मामले में व्यक्तिगत तलाशी के दौरान जब्त की गई नकदी और अन्य सामान की रिहाई की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चालान और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का अवलोकन किया।
अदालत ने पाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड मोबाइल फोन से प्राप्त नहीं किए गए थे और किसी प्रकार का डाटा भी नहीं निकाला गया था। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 27-ए का आरोप भी प्रथम दृष्टया नहीं बनता है। ऐसे में आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद नकदी और सामान को पुलिस के पास रखने का कोई उद्देश्य नहीं रह जाता।
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इस संबंध में अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी एक लिखित आश्वासन देगी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब भी न्यायालय निर्देश देगा, वह इन वस्तुओं को प्रस्तुत करेगी।
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी के कब्जे से बरामद 60,600 रुपये नकद, आधार कार्ड और दो मोबाइल फोन सुपुर्दनामा पर लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इन वस्तुओं को लंबे समय तक पुलिस अभिरक्षा में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत में दायर आवेदन के अनुसार, आरोपी इकरा जान की ओर से पुलिस थाना विजयपुर में दर्ज मामले में व्यक्तिगत तलाशी के दौरान जब्त की गई नकदी और अन्य सामान की रिहाई की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चालान और अभियोजन पक्ष की आपत्तियों का अवलोकन किया।
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अदालत ने पाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड मोबाइल फोन से प्राप्त नहीं किए गए थे और किसी प्रकार का डाटा भी नहीं निकाला गया था। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 27-ए का आरोप भी प्रथम दृष्टया नहीं बनता है। ऐसे में आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद नकदी और सामान को पुलिस के पास रखने का कोई उद्देश्य नहीं रह जाता।
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इस संबंध में अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी एक लिखित आश्वासन देगी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब भी न्यायालय निर्देश देगा, वह इन वस्तुओं को प्रस्तुत करेगी।