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अक्तूबर से पालतु कुत्तों का होगा पंजीकरण
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जम्मू। नगर निगम शहर में अक्तूबर माह से पालतु कुत्तों का पंजीकरण अभियान शुरू करने जा रहा है। पंजीकरण करवाने पर मालिकों को पांच सौ रुपये जमा करवाने होंगे। पंजीकरण एक साल के लिए होगा। दूसरे साल के पंजीकरण के लिए तीन सौ रुपये देना होगा। इससे पहले नगर निगम पालतु कुत्तों का पंजीकरण नहीं कर रहा था। नगर निगम के अनुसार लोगों ने घरों में पालतु कुत्ते पाले हैं लेकिन निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। साल में एक बार कुत्तों को एंटी रेबिज इंजेक्शन लगाना भी जरूरी होगा। इसका विवरण भी निगम को देना होगा। इससे शहर में रेबिज के मरीजों में कमी आएगी।
अकसर पालतु कुत्तों को रेबिज के इंजेक्शन नहीं लगाए जाते। ऐसे में कुत्ते लोगों को काटते हैं। इस कारण बार-बार शिकायतें नगर निगम को आ रही थीं। हालांकि शहर में लावारिस कुत्तों का पंजीकरण अभियान नगर निगम की ओर से हर साल चलाया जाता है। शहर में सत्तर हजार के करीब कुत्ते हैं। वेटनरी अधिकारी डा सुशील ने बताया कि अक्तूबर माह से अभियान को तेज किया जाएगा। पालतु कुत्तों का पंजीकरण किया जाएगा। साल में इन्हें एंटी रेबिज इंजेक्शन लगाना जरूरी होगा।
पशुओं की अक्तूबर से फिर शुरू होगी टैगिंग
जम्मू। शहर में नगर निगम पशुओं की अक्तूबर से फिर से टैगिंग शुरू करेगा। पशुओं के कान पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी डिवाइस लगाई जाएगी। इसके माध्यम से पशुओं का तमाम रिकॉर्ड नगर निगम के पास भी रहेगा। मौजूदा समय में दूध न देने वाले पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है। इस कारण सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ गई है। टैगिंग होने से पशुओं की आसानी से पहचान हो सकेगी। साथ ही नगर निगम पशु छोड़ने पर जुर्माना भी करेगा। पहले चरण में एक हजार पशुओं को कवर किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में डेयरियों में काम शुरू होगा। शहर में 250 से ज्यादा डेयरियां चल रही हैं। मौजूदा समय में 70 के करीब ही डेयरी फार्म पंजीकृत हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में पशुओं को रखा गया है। टैगिंग करने का मकसद पशुओं की संख्या के बारे में पता करना और उनका पूरा रिकॉर्ड रखना है। टैगिंग के बाद भी अगर कोई पशु सड़क पर दिखता है तो उसे नगर निगम पकड़कर डेयरी में छोड़ेगा।
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पशुओं के कारण हो रहे सड़क हादसे
नरवाल रोड में अभी तक सैकड़ों पशु वाहनों की चपेट में भी आ चुके हैं। बाद में नगर निगम ने इन पशुओं का इलाज भी करवाया है। कुछ पशुओं की टांगें तक टूट गई हैं। इन पशुओं को अब गोशाला में रखा गया है।
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कोट
टैगिंग का दूसरा चरण अक्तूबर से शुरू होगा। पहले एक हजार पशुओं की टैगिंग की गई है। अब दूसरे चरण में तमाम डेयरियों को कवर किया जाएगा। पशुओं को खुला छोड़ने पर जुर्माना भी किया जाएगा।
- डॉ. सुशील शर्मा, वेटरनरी अधिकारी, नगर निगम
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अकसर पालतु कुत्तों को रेबिज के इंजेक्शन नहीं लगाए जाते। ऐसे में कुत्ते लोगों को काटते हैं। इस कारण बार-बार शिकायतें नगर निगम को आ रही थीं। हालांकि शहर में लावारिस कुत्तों का पंजीकरण अभियान नगर निगम की ओर से हर साल चलाया जाता है। शहर में सत्तर हजार के करीब कुत्ते हैं। वेटनरी अधिकारी डा सुशील ने बताया कि अक्तूबर माह से अभियान को तेज किया जाएगा। पालतु कुत्तों का पंजीकरण किया जाएगा। साल में इन्हें एंटी रेबिज इंजेक्शन लगाना जरूरी होगा।
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पशुओं की अक्तूबर से फिर शुरू होगी टैगिंग
जम्मू। शहर में नगर निगम पशुओं की अक्तूबर से फिर से टैगिंग शुरू करेगा। पशुओं के कान पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी डिवाइस लगाई जाएगी। इसके माध्यम से पशुओं का तमाम रिकॉर्ड नगर निगम के पास भी रहेगा। मौजूदा समय में दूध न देने वाले पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है। इस कारण सड़कों पर पशुओं की संख्या बढ़ गई है। टैगिंग होने से पशुओं की आसानी से पहचान हो सकेगी। साथ ही नगर निगम पशु छोड़ने पर जुर्माना भी करेगा। पहले चरण में एक हजार पशुओं को कवर किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में डेयरियों में काम शुरू होगा। शहर में 250 से ज्यादा डेयरियां चल रही हैं। मौजूदा समय में 70 के करीब ही डेयरी फार्म पंजीकृत हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में पशुओं को रखा गया है। टैगिंग करने का मकसद पशुओं की संख्या के बारे में पता करना और उनका पूरा रिकॉर्ड रखना है। टैगिंग के बाद भी अगर कोई पशु सड़क पर दिखता है तो उसे नगर निगम पकड़कर डेयरी में छोड़ेगा।
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पशुओं के कारण हो रहे सड़क हादसे
नरवाल रोड में अभी तक सैकड़ों पशु वाहनों की चपेट में भी आ चुके हैं। बाद में नगर निगम ने इन पशुओं का इलाज भी करवाया है। कुछ पशुओं की टांगें तक टूट गई हैं। इन पशुओं को अब गोशाला में रखा गया है।
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कोट
टैगिंग का दूसरा चरण अक्तूबर से शुरू होगा। पहले एक हजार पशुओं की टैगिंग की गई है। अब दूसरे चरण में तमाम डेयरियों को कवर किया जाएगा। पशुओं को खुला छोड़ने पर जुर्माना भी किया जाएगा।
- डॉ. सुशील शर्मा, वेटरनरी अधिकारी, नगर निगम