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जम्मू कश्मीर : पाकिस्तान से आए शरणार्थी मतदान की कतार में खडे होकर बोले, 70 साल बाद हुआ इंसाफ
Sat, 28 Nov 2020 02:46 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
एजेंसी, जम्मू
एजेंसी, जम्मू
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 28 Nov 2020 02:46 PM IST
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मतदान करते हुए मतदाता
- फोटो : एएनआई
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जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव एवं पंचायत उपचुनाव के लिए शनिवार को मतदान हुआ और इस दौरान मतदान केद्रों पर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। अनुच्छेद 370 के समाप्त किए जाने के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी, वाल्मिकी और गुरखा आदि समुदाए के लोग अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय चुनाव में वोट डाले। इसके साथ ही वह जमीन खरीदने एवं नौकरियों के लिए आवेदन करने के पात्र भी बन गए हैं। इतना ही नहीं वो चुनाव भी लड़ सकते है।
पांच अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और उसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। इसके बाद सरकार ने कई कानून लागू किए जिनमें जमीन और नागरिकता से जुड़े कानून भी शामिल हैं। जम्मू के बाहरी इलाके के अखनूर प्रखंड के कोट घारी में एक मतदान के दौरान केंद्र के बाहर कतार में खड़ी पश्चिम पाकिस्तान शरणार्थी समुदाय की युवती सुजाती भारती बोली 'हमने समानता, न्याय एवं आजादी जैसे शब्द सुने हैं और आज हम इन शब्दों के असली मायने महसूस कर रहे हैं।’
उसने विशेष दर्जा हटाने के केंद्र के फैसले के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि उसके समुदाय के लोग 70 साल के बाद स्थानीय चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारती ने कहा कि वह स्थायी निवासी के रूप में कतार में मुक्त महसूस कर रही हैं। आखिरकार सात दशक के लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला। संसदीय चुनाव छोड़कर ये शरणार्थी पिछले साल तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा, पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान से वंचित थे।
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एक अन्य मतदाता बिशन दास (67) ने कहा कि वह अतीत को नहीं याद करना चाहते हैं लेकिन उन्हें उज्ज्वल भविष्य की आस है जिसमें उनके पोते, नाती-नातिनें बाहर जाएं और बिना किसी परेशानी के नौकरी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, 'हम सशक्त हो गए। पहले कोई भी वोट मांगने के लिए हमारे यहां नहीं आया करता था। आज हर उम्मीदवार तीन बार दरवाजे पर आया।' विभाजन के बाद पाकिस्तान से आये पश्चिम पाकिस्तान के ज्यादातर शरणार्थी आरएसपुरा, अखनूर, सांबा, हीरानगर और जम्मू में बस गये। यहां डेढ़ लाख से अधिक शरणार्थी हैं।
आठ चरणों में हो रहे डीडीसी चुनाव के पहले चरण में 43 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा जिनमें 25 कश्मीर में और 18 जम्मू में हैं। सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जो दो बजे समाप्त हो गया। कुल 1,475 उम्मीदवारों में 296 पहले चरण में चुनाव मैदान में हैं। उनमें 172 कश्मीर घाटी और 124 जम्मू क्षेत्र में हैं। जम्मू कश्मीर में 12,153 पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में भी चुनाव हुआ। इनमें 11,814 कश्मीर घाटी में और 339 जम्मू में हैं। पहले चरण में सात लाख मतदाताओं के लिए 1644 मतदान केंद्र तैयार किए गए थे। इनमें कश्मीर में 3.72 लाख और जम्मू में 3.28 लाख मतदाता हैं।
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पांच अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और उसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। इसके बाद सरकार ने कई कानून लागू किए जिनमें जमीन और नागरिकता से जुड़े कानून भी शामिल हैं। जम्मू के बाहरी इलाके के अखनूर प्रखंड के कोट घारी में एक मतदान के दौरान केंद्र के बाहर कतार में खड़ी पश्चिम पाकिस्तान शरणार्थी समुदाय की युवती सुजाती भारती बोली 'हमने समानता, न्याय एवं आजादी जैसे शब्द सुने हैं और आज हम इन शब्दों के असली मायने महसूस कर रहे हैं।’
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उसने विशेष दर्जा हटाने के केंद्र के फैसले के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि उसके समुदाय के लोग 70 साल के बाद स्थानीय चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारती ने कहा कि वह स्थायी निवासी के रूप में कतार में मुक्त महसूस कर रही हैं। आखिरकार सात दशक के लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला। संसदीय चुनाव छोड़कर ये शरणार्थी पिछले साल तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा, पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान से वंचित थे।
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एक अन्य मतदाता बिशन दास (67) ने कहा कि वह अतीत को नहीं याद करना चाहते हैं लेकिन उन्हें उज्ज्वल भविष्य की आस है जिसमें उनके पोते, नाती-नातिनें बाहर जाएं और बिना किसी परेशानी के नौकरी हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, 'हम सशक्त हो गए। पहले कोई भी वोट मांगने के लिए हमारे यहां नहीं आया करता था। आज हर उम्मीदवार तीन बार दरवाजे पर आया।' विभाजन के बाद पाकिस्तान से आये पश्चिम पाकिस्तान के ज्यादातर शरणार्थी आरएसपुरा, अखनूर, सांबा, हीरानगर और जम्मू में बस गये। यहां डेढ़ लाख से अधिक शरणार्थी हैं।
आठ चरणों में हो रहे डीडीसी चुनाव के पहले चरण में 43 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा जिनमें 25 कश्मीर में और 18 जम्मू में हैं। सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जो दो बजे समाप्त हो गया। कुल 1,475 उम्मीदवारों में 296 पहले चरण में चुनाव मैदान में हैं। उनमें 172 कश्मीर घाटी और 124 जम्मू क्षेत्र में हैं। जम्मू कश्मीर में 12,153 पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों में भी चुनाव हुआ। इनमें 11,814 कश्मीर घाटी में और 339 जम्मू में हैं। पहले चरण में सात लाख मतदाताओं के लिए 1644 मतदान केंद्र तैयार किए गए थे। इनमें कश्मीर में 3.72 लाख और जम्मू में 3.28 लाख मतदाता हैं।