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भागवत कथा सुनने से मिलती है पापों से मुक्ति : राकेश शास्त्री
Sat, 20 Jul 2024 05:44 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 20 Jul 2024 05:44 AM IST
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नगर के आप शंभू महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए सभी लोगों को समय निकाल कर कथा का श्रवण करना चाहिए। यह अपील कथावाचक राकेश शास्त्री ने शुक्रवार को नगर के आप शंभू महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन संगत से की।
उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को भी कथा सुनने के बाद मुक्ति मिली थी। पांडव जब स्वर्ग में चले गए तो उन्होंने और भगवान कृष्ण ने राजा बने परीक्षित को एक संदूख कभी भी नहीं खोलने की हिदायत दी। लेकिन, परीक्षित ने उन के जाने के बाद उसे खोला तो उसे उस में एक मुकुट मिला। नवरत्न जड़ित मुकुट को पहनने की इच्छा को वह रोक नहीं पाए और उसे अपने सिर पर रख लिया। इसे पहनने के उपरांत ही उन का मन पाप और शिकार करने का हुआ। यह मुकुट राजा जरासंध का था, जिसने उसे किसानों से वसूले जाने वाले कर से और किसानों की खून पसीने की कमाई से बनवाया था। जंगल में जा कर राजा परीक्षित साधु के गले में सांप डाल देते है जिसे देख ऋषि का पुत्र आग बबूला हो कर ऐसा करने वाले को सात दिन के भीतर मरने का श्राप देते हैं। परीक्षित के राजा होने के बारे में पता चलते ही वह उनसे मिलने महल जाते हैं वहीं परीक्षित भी मुकुट खोलने के बाद अपने किए पाप कार्य को याद करते हैं। श्राप के नहीं टलने की स्थिति में राजा परीक्षित धर्म कर्म के काम करते हैं। साथ ही मुक्ति के लिए आने वाले सात दिनों तक भागवत कथा सुनते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए सभी लोगों को समय निकाल कर कथा का श्रवण करना चाहिए। यह अपील कथावाचक राकेश शास्त्री ने शुक्रवार को नगर के आप शंभू महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन संगत से की।
उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को भी कथा सुनने के बाद मुक्ति मिली थी। पांडव जब स्वर्ग में चले गए तो उन्होंने और भगवान कृष्ण ने राजा बने परीक्षित को एक संदूख कभी भी नहीं खोलने की हिदायत दी। लेकिन, परीक्षित ने उन के जाने के बाद उसे खोला तो उसे उस में एक मुकुट मिला। नवरत्न जड़ित मुकुट को पहनने की इच्छा को वह रोक नहीं पाए और उसे अपने सिर पर रख लिया। इसे पहनने के उपरांत ही उन का मन पाप और शिकार करने का हुआ। यह मुकुट राजा जरासंध का था, जिसने उसे किसानों से वसूले जाने वाले कर से और किसानों की खून पसीने की कमाई से बनवाया था। जंगल में जा कर राजा परीक्षित साधु के गले में सांप डाल देते है जिसे देख ऋषि का पुत्र आग बबूला हो कर ऐसा करने वाले को सात दिन के भीतर मरने का श्राप देते हैं। परीक्षित के राजा होने के बारे में पता चलते ही वह उनसे मिलने महल जाते हैं वहीं परीक्षित भी मुकुट खोलने के बाद अपने किए पाप कार्य को याद करते हैं। श्राप के नहीं टलने की स्थिति में राजा परीक्षित धर्म कर्म के काम करते हैं। साथ ही मुक्ति के लिए आने वाले सात दिनों तक भागवत कथा सुनते हैं।
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