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यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बोले,'अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बने मंदिर'

Wed, 06 Sep 2017 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 06 Sep 2017 11:05 PM IST
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Ram Temples built on the Ram Janmabhoomi in Ayodhya
सईद वसीम रिजवी - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सईद वसीम रिजवी ने कहा है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले में समझौता ही एकमात्र हल है। शिया वक्फ बोर्ड ने सुलह और बातचीत से मामले को हल करने की तरफ कदम बढ़ाए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी समेत हिंदू संगठनों जिसमें आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, निरमोही अखाड़ा व अन्य संबंधित पक्षकारों से बातचीत हुई है और इस पर सहमति बन गई है कि श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर का निर्माण हो।

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साथ ही पास के मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जाए। भव्य मस्जिद के निर्माण में हिंदू संगठनों ने भी सहयोग देने की पेशकश की है। इस समझौते के बारे में देश भर के मुस्लिम समुदाय के लोगों को राजी करने की कवायद के तहत वह जम्मू पहुंचे हैं। जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में रिजवी ने कहा कि समझौते में केवल सूनी वक्फ बोर्ड व उससे जुड़े कुछ पक्षकार बाधा बने हुए हैं और बातचीत के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। यह सब पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है।
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पाकिस्तान की तरफ से इन लोगों को फंडिंग होती है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत में शांति से वर्षों पुराना मसला हल हो जाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में विवादित मस्जिद का निर्माण मीर बाकी ने वर्ष 1528 में कराया था और 1946 तक इस मस्जिद के सारे मामले शिया वक्फ बोर्ड ही देखता रहा। 1944 में मस्जिद का पंजीकरण सूनी वक्फ बोर्ड ने कर लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में सूनी वक्फ बोर्ड के पंजीकरण को रद्द कर दिया।

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'सुप्रीम कोर्ट में मामले को बातचीत से हल करने का प्रस्ताव रखा'

Ram Temples built on the Ram Janmabhoomi in Ayodhya
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

ऐसे में शिया वक्फ बोर्ड को इस मामले में केस लड़ने या न लड़ने का पूरा अधिकार है। शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को बातचीत के माध्यम से हल करने का प्रस्ताव रखा है। इसलिए वह पूरे देश में मुस्लिम समुदाय के लोगों को तैयार कर रहे हैं कि आपसी सुलह, समझौते से मसला हल हो। लड़ाई लड़ने का कोई फायदा नहीं है।

न तो मुस्लिमों को और न ही हिंदुओं को यह लड़ाई लड़ने से कोई लाभ है। उन्होंने कहा कि जम्मू में कई संगठनों से उनकी बात हुई है और वह समझौते से सहमत हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जम्मू में संगठनों के नेता अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उनका अगला पड़ाव अब कश्मीर होगा।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में भी जो कुछ हो रहा है वह पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है। आपसी बातचीत से ही मसले हल होने चाहिए। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद मामले में 2000 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। ऐसे में खूनखराबा बंद होना चाहिए और समझौता ही शांतिपूर्ण तरीके से मसले का एक मात्र हल है।  

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