फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Raksha Bandhan 2023: Bhadra to remain on festival of Raksha Bandhan take care of these things

Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन के पर्व पर रहेगा भद्रा का साया, इन बातों का रखें ख्याल

Wed, 23 Aug 2023 05:18 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Wed, 23 Aug 2023 05:18 PM IST
सार

शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी का त्योहार नहीं मनाना चाहिए। इसलिए 30 अगस्त बुधवार रात्रि 9 बजकर 4 मिनट के बाद राखी बांध सकते हैं।

विज्ञापन
Raksha Bandhan 2023: Bhadra to remain on  festival of Raksha Bandhan take care of these things
Rakhi - फोटो : Istock

विस्तार

रक्षाबंधन का त्योहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 31 अगस्त को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। लेकिन सावन पूर्णिमा तिथि शुरू होते ही भद्रा लग रही है जो 30 अगस्त सुबह 10 बजकर 59 मिनट से शुरू होगी और उसी दिन रात्रि 9 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगी।

विज्ञापन


शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी का त्योहार नहीं मनाना चाहिए। इसलिए 30 अगस्त बुधवार रात्रि 9 बजकर 4 मिनट के बाद राखी बांध सकते हैं। सूर्योदय व्यापिनी श्रावण पूर्णिमा तिथि 31 अगस्त को है। वीरवार को सुबह 5ः36 से 7ः06 के मध्यकाल में राखी बांधने से ऐश्वर्य और सौभाग्य की वृद्धि होगी।
विज्ञापन


दूर्वाष्टमी व्रत कल, पूजन के लिए पूरा दिन शुभ

जम्मू संभाग में विशेष महत्व रखने वाली दूर्वाष्टमी का व्रत 24 अगस्त को है। इस व्रत को द्रूवड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत वंशवृद्धि, संतान की मंगलकामना और सुख प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस बार व्रत पर असमंजस है। धर्मग्रंथों के अनुसार सिंहस्थ सूर्य की कालावधि में रोहिण मुहूर्त ( दिन का नवम मुहूर्त ) व्यापिनी भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को यह व्रत आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिस वर्ष भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के समय कन्या राशि में सूर्य (अश्विन मास) आ जाए या अगस्त्य तारे का उदय हो तो उस स्थिति में पूर्ववर्त्ती किसी अन्य मास की अष्टमी (भाद्रपद कृष्ण या श्रवण शुक्ल अष्टमी) में व्रत करते हैं। जब अगस्त्य तारा अस्त हो उस वर्ष भाद्रपद शुक्ल अष्टमी 23 सितंबर को आती है। लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में इस बार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी सात सितंबर से पहले अगस्त्य तारा उदय हो चुका होगा। इस कारण 24 अगस्त को दुर्वाष्टमी का व्रत शुभ होगा।


द्रूवड़ी पूजन का शुभ मुहूर्त 24 अगस्त को पूरा दिन शुभ है। तड़के 03:32 बजे से भद्रा भी शुरू होगी और दिवा 03:22 बजे पर समाप्त होगी। धर्मग्रंथों के अनुसार जब चंद्रमा मेष, वृष, मिथुन, वृश्चिक राशि में रहे तो भद्रा स्वर्ग लोक की होती है। भद्रा जब स्वर्ग लोक की होती है तो शुभ कार्य कर सकते हैं। 24 अगस्त को भद्रा वृश्चिक राशि में होगी, इसलिए दूर्वाष्टमी पूजन पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ब्यूरो

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed