Rajouri Attack : जम्मू संभाग में पहली बार आतंकियों के पास से मिलीं कवच भेदी गोलियां
Rajouri Attack: अभी तक इस तरह की घातक गोलियां आतंकी कश्मीर घाटी में ही कर रहे थे। एल्युमिनियम धातु से तैयार यह कारतूस बुलेट प्रूफ गाड़ियों को भी भेद सकते हैं। ये कारतूस अमेरिका सेना द्वारा अफगानिस्तान छोड़ते समय जो हथियार वहां छोड़े गए थे इस तरह के कारतूस उसका अहम हिस्सा रहे हैं।
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जम्मू संभाग में आतंकियों ने पहली बार दरहाल में सेना के कैंप पर हमले में आतंकियों ने कवच भेदी गोलियों (आर्मर पियर्स बुलेट) का इस्तेमाल किया। अभी तक इस तरह की घातक गोलियां आतंकी कश्मीर घाटी में ही कर रहे थे। एल्युमिनियम धातु से तैयार यह कारतूस बुलेट प्रूफ गाड़ियों को भी भेद सकते हैं। ये कारतूस अमेरिका सेना द्वारा अफगानिस्तान छोड़ते समय जो हथियार वहां छोड़े गए थे इस तरह के कारतूस उसका अहम हिस्सा रहे हैं। जो अब जम्मू-कश्मीर के आतंकियों तक पहुंच चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि इस तरह के कारतूस का प्रयोग आतंकी कश्मीर घाटी में आतंकी सेना के काफिले के बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए करते हैं। इन कारतूस की मार इतनी घातक होती है कि बुलेट प्रूफ गाड़ी को भी भेद कर अंदर बैठे व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे कारतूस में सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह बुलेट प्रूफ जैकेट, लोहे की शीट या बुलेट प्रूफ गाड़ी को दूर से भी भेद कर आरपार हो जाते हैं।
एक आम राउंड 40 या 50 मीटर की दूरी से बुलेट प्रूफ गाड़ी या जैकेट को हल्का नुकसान पहुंचाता है, लेकिन यह एलुमीनियम का राउंड 100 या 150 मीटर की दूरी से भी बुलेट प्रूफ गाड़ी या जैकेट को छेद करके पार हो जाता है। दरहाल में फिदायीन हमले में मारे गए आतंकवादियों से ऐसे राउंड मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि मारे गए दहशतगर्द बड़ी साजिश के तहत यहां पहुंचे थे।
ऐसी गोलियों से निपटने के लिए सेना ने मंगाई नई बुलेट प्रूफ जैकेट
कश्मीर घाटी में कुछ आतंकियों द्वारा अमेरिकी कवच भेदी गोलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसको देखते हुए सेना नई बुलेट प्रूफ जैकेट मंगा रही है। अभी सेना लेवल 3 जैकेट का इस्तेमाल कर रही है और जल्द ही उसे अब लेवल 4 जैकेट मिल जाएंगी। सूत्रों ने यह भी बताया कि अप्रैल में सेना की कमांडर कांफ्रेंस में शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
एक महीने से पीर पंजाल में छुपे थे दोनों आतंकी
राजोरी के दरहाल में सेना के कैंप पर फिदायीन हमला सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नाकामी माना जा रहा है। एक महीने पहले इनपुट मिला था कि पीर पंजाल में दो आतंकी छुपे हुए हैं। बावजूद इसके एजेंसियां आतंकियों को ढूंढ नहीं पाईं और हमला हो गया।
जानकारी के अनुसार, चार जुलाई को रियासी में स्थानीय लोगों ने दो आतंकियों राजोरी के तालिब हुसैन और पुलवामा के फैजल अहमद डार को पकड़ा था। इन आतंकियों से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि इनके साथ और भी आतंकी हैं। इसके बाद पुलिस ने राजोरी से 2 और जम्मू से 3 आतंकी गिरफ्तार किए थे। उस समय एडीजीपी मुकेश सिंह ने बताया था कि आतंकी तालिब ने खुलासा किया है कि दो आतंकी राजोरी-पुंछ के पीर पंजाल क्षेत्र में मौजूद हैं। इन आतंकियों को यही लोग कश्मीर से लाए थे और अपने घरों में पनाह भी देते थे।
पिछले एक महीने से पुलिस को इसकी जानकारी थी। सभी खुफिया एजेंसियों के पास भी यह इनपुट था। राजोरी और पुंछ जैसे जिलों में सेना, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एमआई, पुलिस के सीआईडी, सीआई जैसी खुफिया एजेंसियों के कई अफसर और कर्मी तैनात हैं। बावजूद इसके दो आतंकियों का पता नहीं लगाया जा सका और स्वतंत्रता दिवस से पहले आतंकियों ने फिदायीन हमला कर दिया।
दरहाल में मारे गए आतंकियों की अभी शिनाख्त नहीं हुई है। इसलिए यह कहना कि यह वही आतंकी है जिनके बारे में तालिब ने जानकारी दी थी जल्दबाजी होगा।
-मुकेश सिंह, एडीजीपी (जम्मू संभाग)