किसानों के सपनों को तहस-नहस कर गई बारिश
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खेतों में गेहूं की सड़ी फसल देखकर किसान रो रहे हैं। पिछले सात महीने में दो बार फसल तबाह होने से किसानों की कमर टूट गई है। किसान अपने खेतों में पहुंच कर फसलों को देखकर देखकर घंटों सोच में डूबे रहते हैं।
मानों सारे सपने फसलों के तबाह होने से बिखर गए। फसल के सहारे किसी ने बेटी की शादी करने का सपना देखा था, तो किसी ने बच्चों को पढ़ाई कराने के लिए। किसी को घर बनाना है तो किसी की दो वक्त की रोटी भी फसल के सहारे है।
तबाही का मंजर देख हर एक किसान सकते में है और नजर गढ़ाए इस उम्मीद में बैठा है कि कोई उनकी मदद करने आएगा। गेहूं की फसल जम्मू संभाग के सभी जिलों में लगभग नष्ट हो गई है। इसे लेकर किसानों में हाहाकार मचा हुआ है।
कृषि विभाग की ओर से अभी तक इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई। कुछ ही दिनों में दरबार भी मूव हो जाएगा। ऐसे में किसानों को राहत मिलने की संभावना कम ही है।
बेटियों की शादी की चिंता
केस 1
बेटियों की शादी की चिंता
नाम : सतपाल
निवासी : कृष्णा नगर बस्ती, मीरां साहिब
सतपाल अपने खेतों में सड़ी फसल देख परेशान होकर बैठा था। सतपाल से बात करने पता चला कि फसल तबाह होने से उसकी हालत किस कदर हो गई है। सतपाल की तीन बेटियां हैं और बेटा कोई नहीं। परिवार में कमाने वाले वह अकेले हैं। एक बेटी की शादी कर दी है और दो की तैयारियों की चिंता है। सारा खर्च फसल पर निर्भर है। सतपाल ने बताया कि करीब 10 एकड़ पर उसने गेहूं की फसल लगाई थी। सारी फसल खराब हो गई। दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। चिंता सता रही है कि बेटियों की शादी कैसे होगी।
केस 2
बच्चों की पढ़ाई पर संकट
नाम: रूड़ा राम
निवासी: गाजियां
रूड़ा राम के तीन बच्चे हैं। एक बेटी और दो बेटे। तीनों पढ़ाई कर रहे हैं। सालभर का खर्चा फसलों पर निर्भर करता है। बच्चों की पढ़ाई का खर्च फसल बेच कर ही निकलता है। पिछले सात महीने में दो फसलें तबाह हो गईं। न बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस निकल रही है और न ही घर का अन्य खर्च। रूड़ा राम का कहना है कि फसल देखकर रोना आता है। कई महीनों से उधार की जिंदगी जीने पर मजबूर हो गए हैं।
3 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल तबाह
जम्मू संभाग में 3.98 लाख हेक्टेयर पर गेहूं की फसल लगी है। इसमें से बारिश की वजह से तीन लाख हेक्टेयर तबाह हो चुकी है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बची हुई एक लाख हेक्टेयर की पैदावार भी कम ही होगी।
कुछ ऐसे हैं आंकड़ें
जम्मू 93764 हेक्टेयर: तबाही 70 हजार हेक्टेयर
सांबा 28457: तबाही 20 हजार हेक्टेयर
कठुआ 42 हजार: तबाही 20 हजार हेक्टेयर
उधमपुर 44679 : तबाही 25 हजार हेक्टेयर
रियासी 25519: तबाही 15 हजार हेक्टेयर
राजोरी 53331: तबाही 30 हजार हेक्टेयर
पुंछ 27687: तबाही 20 हजार हेक्टेयर
डोडा 30619 : तबाही 18 हजार हेक्टेयर
किश्तवाड़ 17474 : तबाही 13 हजार हेक्टेयर
रामबन 15352 : तबाही 12 हजार हेक्टेयर
अंतिम दौर पर सब चकनाचूर
तबाह हुई तीन लाख हेक्टेयर पर लगी गेहूं की फसल तैयार होने से पहले ही डेढ़ लाख हेक्टेयर तक तबाह हो गई थी। बची डेढ़ लाख अभी कुछ दिन पहले हुई बारिश की वजह से नष्ट हो गई। किसानों को उम्मीद थी कि कुछ रिकवरी हो जाएगी, लेकिन अभी बारिश ने गेहूं की अंतिम स्टेज को तहस नहस कर दिया।
इस समय गेहूं अंतिम दौर पर था। गेहूं का सिट्टा बन रहा था, लेकिन बारिश होने से बीच में दाना ही नहीं बना। जो दाना बना, वह गीला है और एक-दो दिन धूप लगने से सड़ जाएगा।