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बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण की कवायद तेज
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जम्मू। मंदिरों के शहर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ऐतिहासिक बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन को विरासत स्थल (धरोहर) के रूप में विकसित करने की कवायद तेज की गई है। पर्यटन विभाग परियोजना की डीपीआर के लिए जल्द दिल्ली की एक सलाहकार कंपनी से अनुबंध करेगा, जिसके लिए औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सलाहकार रेलवे स्टेशन पर विरासत पर्यटन के लिहाज से परियोजना रिपोर्ट देंगे। इसके बाद रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण पर काम किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को पुरानी शक्ल देने के साथ वहां लोगों के मनोरंजन के साधन उपलब्ध करवाना प्रस्तावित है। इस स्टेशन में प्राचीन गौरव को बहाल करने पर काम किया जाएगा। पर्यटन निदेशक जम्मू विवेकानंद राय के अनुसार रेलवे स्टेशन को विरासती स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जल्द डीपीआर तैयार की जाएगी। इससे पहले सलाहकार से परियोजना रिपोर्ट ली जाएगी, जिसके आधार पर डीपीआर बनाई जाएगी।
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ट्रैक पर बसी आबादी को नहीं छेड़ा जाएगा
परियोजना में पुराने ट्रैक को बहाल करने का प्रावधान नहीं है, क्योंकि लंबे समय से ट्रैक के आसपास बड़ी आबादी बस गई है। जिससे स्टेशन के आसपास के स्थल को ही विरासत स्थल के रूप में विकसित करने पर काम किया जाएगा। रेलवे विभाग की भूमि को 1954 में परिवहन विभाग को हस्तांतरित किया गया था और वर्तमान में यहां जेकेआरटीसी यार्ड और कार्यशाला स्थित है।
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यहां से सियालकोट
के लिए चलती थी रेलगाड़ी
प्रासंगिक रूप से पुराना रेलवे स्टेशन (बिक्रम चौक में) जम्मू-सियालकोट लाइन पर था, यह रेलमार्ग 43 किलोमीटर का था और व्यापार के लिए अधिक प्रयोग में लाया जाता था। इसमें मीरां साहिब, रणबीर सिंह पोरा और सुचेतगढ़ कसबे आते हैं। 1897 में बने इस रेलवे स्टेशन का भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सियालकोट से रेल लिंक टूट गया था।
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इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को पुरानी शक्ल देने के साथ वहां लोगों के मनोरंजन के साधन उपलब्ध करवाना प्रस्तावित है। इस स्टेशन में प्राचीन गौरव को बहाल करने पर काम किया जाएगा। पर्यटन निदेशक जम्मू विवेकानंद राय के अनुसार रेलवे स्टेशन को विरासती स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जल्द डीपीआर तैयार की जाएगी। इससे पहले सलाहकार से परियोजना रिपोर्ट ली जाएगी, जिसके आधार पर डीपीआर बनाई जाएगी।
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ट्रैक पर बसी आबादी को नहीं छेड़ा जाएगा
परियोजना में पुराने ट्रैक को बहाल करने का प्रावधान नहीं है, क्योंकि लंबे समय से ट्रैक के आसपास बड़ी आबादी बस गई है। जिससे स्टेशन के आसपास के स्थल को ही विरासत स्थल के रूप में विकसित करने पर काम किया जाएगा। रेलवे विभाग की भूमि को 1954 में परिवहन विभाग को हस्तांतरित किया गया था और वर्तमान में यहां जेकेआरटीसी यार्ड और कार्यशाला स्थित है।
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यहां से सियालकोट
के लिए चलती थी रेलगाड़ी
प्रासंगिक रूप से पुराना रेलवे स्टेशन (बिक्रम चौक में) जम्मू-सियालकोट लाइन पर था, यह रेलमार्ग 43 किलोमीटर का था और व्यापार के लिए अधिक प्रयोग में लाया जाता था। इसमें मीरां साहिब, रणबीर सिंह पोरा और सुचेतगढ़ कसबे आते हैं। 1897 में बने इस रेलवे स्टेशन का भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सियालकोट से रेल लिंक टूट गया था।