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क्यों पड़ी राहुल और उमर की दोस्ती में दरार?

Thu, 27 Nov 2014 02:16 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 02:16 PM IST
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rahul gandhi and omar abdullah friendship broken

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की वर्षों पुरानी दोस्ती में दरार आ गई लगती है। यह दरार विधानसभा चुनाव के दौरान तब सामने आई जब राहुल ने अपने उमर पर विकास कार्यों में सहयोग न देने का आरोप लगाया। यह अलग बात है कि उमर ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

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राहुल और उमर काफी समय से एक दूसरे को जानते पहचानते और पसंद करते हैं। पिछले छह वर्षों के दौरान नेकां-कांग्रेस गठबंधन की सरकार में उनकी राजनीतिक दोस्ती खूब परवान चढ़ी। राहुल ने हमेशा उमर और गठबंधन सरकार के कार्यों की सराहना की। बीते लोकसभा चुनाव में उमर ने रियासत में अपने दोस्त की भरपूर मदद की।
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हर जगह कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने के साथ ही कार्यकर्ताओं को कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने का मंत्र भी दिया। हालांकि, इसके बाद भी कांग्रेस और नेकां का रियासत से सूपड़ा साफ हो गया। विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन टूटने के साथ ही स्थानीय कांग्रेसी नेताओं की उमर के साथ तल्खी बढ़ गई। दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, लेकिन राहुल ने कभी भी न तो उमर पर हमला बोला और न ही उमर ने राहुल पर कोई टिप्पणी की।
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उमर ने राहुल के आरोपों की अनदेखी करते हुए चुप्पी साधी

rahul gandhi and omar abdullah friendship broken

मंगलवार को पहली बार राहुल गांधी ने लोलाब में रियासत की अपनी पहली रैली में उमर पर निशाना साधा। अपने दोस्त पर हमला करते हुए राहुल ने कहा कि छह साल तक केंद्र तथा राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। इसके बावजूद रियासत के लिए कांग्रेस उतना कुछ नहीं कर पाई जितना करने की उसकी मंशा थी।

उमर ने इसके लिए सहयोग नहीं दिया। हालांकि, उमर ने राहुल के आरोपों की अनदेखी करते हुए चुप्पी साध ली। राहुल के इस हमले के बाद कांग्रेस तथा नेकां के बीच की तल्खी और बढ़ गई। स्थानीय नेता अब और मुखर हो गए। उमर पहले भी स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए कहते रहे हैं कि राज्य में जो कुछ भी अच्छा हुआ वह सब कांग्रेस के खाते में और बुरे कामों का ठीकरा नेकां के सिर पर, यह नहीं चलेगा।

स्थानीय नेताओं के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने तो यहां तक कहा कि कांग्रेस ने जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने में भरपूर सहयोग नहीं किया। इस वजह से जितना काम करना चाहते थे, उतना नहीं कर पाए। फिर भी उन्होंने जनता की सेवा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

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