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गुज्जर बकरवाल समुदाय ने सरकार के खिलाफ जताया रोष
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बाड़ी ब्राह्मणा। सरोर अड्डा क्षेत्र में रविवार को अपनी पार्टी के एसटी के राज्य प्रधान सलीम चौधरी ने एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। इसमें गुज्जर बकरवाल समुदाय के सदस्यों की बैठक हुई। इस बैठक में विशेष रूप से इस जनजाति को फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत अधिकार न मिलने को लेकर सरकार के प्रति रोष व्यक्त किया गया।
इस मौके पर उन्होंने बताया कि जिला पंचायतों में रहने वाले गुज्जर और बकरवाल समुदाय के सदस्यों ने सूचित किया था कि शासन के आदेशानुसार समितियों का गठन नहीं किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में फॉरेस्ट राइट एक्ट अधिनियम के मूल लाभार्थी गुज्जर और बकरवाल समुदाय हैं। लेकिन, इसके बावजूद इस अनुसूचित जनजाति को अधिकार देने में सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। फॉरेस्ट राइट अधिनियम के तहत एक साल में राज्य स्तर पर कोई भी एसटी श्रेणी की बैठक नहीं की गई है।
इस मौके पर गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोगों ने एलजी प्रशासन से गुहार लगाई है कि पूरे जम्मू कश्मीर में फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत समितियों के गठन की गंभीरता से समीक्षा की जाए। और, सरकार के अनुसार उन्हें पूर्ण गठित किया जाए। निगरानी समितियों में गुज्जर और बकरवालों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत उद्देश्यों को सुचारू रूप से चलाया जा सके। और, जमीनी स्तर पर अधिकारियों को मामले का कड़ाई से अनुपालन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
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इस मौके पर उन्होंने बताया कि जिला पंचायतों में रहने वाले गुज्जर और बकरवाल समुदाय के सदस्यों ने सूचित किया था कि शासन के आदेशानुसार समितियों का गठन नहीं किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में फॉरेस्ट राइट एक्ट अधिनियम के मूल लाभार्थी गुज्जर और बकरवाल समुदाय हैं। लेकिन, इसके बावजूद इस अनुसूचित जनजाति को अधिकार देने में सरकार कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। फॉरेस्ट राइट अधिनियम के तहत एक साल में राज्य स्तर पर कोई भी एसटी श्रेणी की बैठक नहीं की गई है।
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इस मौके पर गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोगों ने एलजी प्रशासन से गुहार लगाई है कि पूरे जम्मू कश्मीर में फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत समितियों के गठन की गंभीरता से समीक्षा की जाए। और, सरकार के अनुसार उन्हें पूर्ण गठित किया जाए। निगरानी समितियों में गुज्जर और बकरवालों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत उद्देश्यों को सुचारू रूप से चलाया जा सके। और, जमीनी स्तर पर अधिकारियों को मामले का कड़ाई से अनुपालन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
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