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ग्रामीणों ने की वन व राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी

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रियासी में वन विभाग जिला कार्यालय के बाहर इकटठा हुए नगर व कौलसर के ग्रामीण। - फोटो : REASI
रियासी। नगर तथा कौलसर के ग्रामीणों ने शुक्रवार को एक रोष रैली निकालते हुए वन और राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही बारी बारी से दोनों कार्यालयों के बाहर धरना दिया।
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दोनों गांवों के लोग सुबह स्थानीय पेट्रोल पंप के पास इकट्ठा हुए, जहां से पैदल चलते हुए डीएफओ कार्यालय तक पहुंचे। वहां ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की। थोड़ी देर के लिए वे कार्यालय के मुख्य गेट पर ही खड़े रहे। इसके बाद ग्रामीण नारेबाजी करते हुए पास ही स्थित तहसीलदार कार्यालय में पहुंचे, जहां नायाब तहसीलदार के खिलाफ नारे लगाए गए। इस दौरान ग्रामीण मौके पर ही धरना देकर बैठ गए।
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धरने के दौरान मौके पर आए तलवाड़ा के पूर्व सरपंच देव राज खजूरिया और कौलसर के पूर्व सरपंच रतन सिंह ने कहा कि उनके ग्रामीणों के साथ विभाग भेदभाव कर रहा है। सरकार ने हाल ही में नगर तथा कौलसर में खैर की लकड़ी काटने की अनुमति जारी की है, जिसके लिए ग्रामीणों ने अपनी निजी जमीन पर लगे खैर के पेड़ काटने के लिए फाइल विभाग को दी। लेकिन, समय हो जाने के कारण उनकी फाइल को वापस कर दिया गया। इसके लिए डीएफओ और राजस्व विभाग के नायाब तहसीलदार दोषी हैं। उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि आम गरीब लोगों का नुकसान हुआ है, जिसकी कब भरपाई होगी? कुछ पता नहीं है। बाद में ग्रामीणों की रोष रैली मिनी सचिवालय पहुंची, जहां उनको गेट के अंदर नहीं जाने दिया गया। मौके पर पहुंचे एसीआर संजय बड़याल ग्रामीणों से मिलने पहुंचे। बाद में ग्रामीण डीसी बबीला रकवाल से भी मिले जिन्होंने उन्हें भरोसा दिया कि वह अपने उच्चाधिकारियों के साथ बात कर मामले का हल निकालने की कोशिश करेंगी।

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दोनों विभागों ने दिए अलग अलग बयान
खैर के पेड़ों की कटाई के लिए नगर व कौलसर गांव के लगभग 50 लोगों को अनुमति न मिलने में दोनों विभागों के अलग अलग तर्क हैं। डीएफओ ज्योत्सना सरकार ने कहा कि 9 फरवरी को उन्हें डिवकॉम से निर्देश मिले थे कि 15 फरवरी तक सभी फाइल भेजी गई है। लेकिन, राजस्व विभाग ने उनको 17 फरवरी को फाइल वापस भेजी, जिसके कारण संबंधित लोगों को अनुमति नहीं दी जा सकी। वहीं, प्रदर्शनकारियों के पास आए तहसीलदार मुंशी राम ने कहा कि वन विभाग ने उनके पास फाइल 15 फरवरी को ही भेजी थी। विभाग ने दिन रात काम कर दो दिनों में ही 17 फरवरी को फाइलें वापस वन विभाग को भेज दी थीं। विभाग के किसी भी कर्मचारी ने रुपयों की मांग नहीं की है। पूरा रिकॉर्ड देख कर फाइल को भेजा गया है। दोनों विभागों के अलग अलग तर्क के बीच डीसी से मिले ग्रामीणों ने अपने धरने को कुछ दिनों के लिए टाल दिया है। लेकिन, ग्रामीणों ने कहा है कि वर्षों के बाद खैर के पेड़ काटने की अनुमति उनके क्षेत्र में जारी हुई है। अगर उनके साथ धोखा किया गया तो वह दोबारा सड़कों पर उतर आएंगे।
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