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Jammu News: पक्की नाैकरी के लिए सड़क पर उतरे डेलीवेजर, पुलिस से धक्का-मुक्की
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- हक के लिए बुलंद की आवाज, सचिवालय कूच के दौरान इंदिरा चौक पर बवाल
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नियमितीकरण की ठोस नीति, न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने सहित अन्य मांगों के समर्थन में बुधवार को जलशक्ति विभाग में संविदा कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मियों ने सचिवालय की ओर बढ़ने की कोशिश की तो इंदिरा चौक पर बवाल हो गया। गुस्साए कर्मियों ने जब पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की तो स्थिति अनियंत्रित हो गई। इस बीच धक्का-मुक्की हुई। इसमें कुछ कर्मचारी सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए।
सुबह करीब 10:30 बजे बीसी रोड स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर हजारों की संख्या में डेलीवेजर जुटना शुरू हुए। दो घंटे तक कार्यालय परिसर में नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने डेलीवेजरों को नियमित करने की बात की है लेकिन स्पष्टता नहीं है। कैसे और कब तक कर्मियों को नियमित किया जाएगा यह नहीं बताया। दोपहर करीब एक बजे नारों के बीच कर्मियों का जनसैलाब सचिवालय की ओर बढ़ा। पुलिस को इसकी जानकारी पहले से थी। इसके लिए इंदिरा चौक पर सचिवालय जाने वाले दोनों रास्तों को छावनी में बदल दिया गया। बैरिकेड्स लगाए गए थे उनके आगे कटीले तार बिछाए थे। पुलिसकर्मी आंसू गैस वाली बंदूक लेकर तैनात थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी तारों के पास पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। कर्मचारी नेताओं से बातचीत करने की कोशिश थी लेकिन बात नहीं बनी। देखते ही देखते टकराव की स्थिति पैदा हो गई। कर्मी सड़क पर ही बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। करीब एक घंटे तक बैठने के बाद कर्मियों के सबर का बांध टूट गया और कंटीले तार व बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान हुई खींचतान में कुछ कर्मी गिर गए।
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30 मार्च तक सरकार को दिया समय
यूनाइटेड इंप्लाइज फ्रंट के सदस्य होशियार चिब ने कहा कि सरकार कई वर्षों से सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी पिला रही है। हमारी मांग है कि संविदा कर्मियों के लिए नियमितीकरण नीति घोषित हो। लंबित वेतन जारी हो यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द मुहर नहीं लगाई तो आने वाले दिनों में जम्मू संभाग की जलापूर्ति ठप कर दी जाएगी। कर्मियों ने 30 मार्च तक प्रदेश सरकार को समय दिया है। इसी दिन 72 घंटे की काम छोड़ हड़ताल होगी। अगर फिर भी सरकार नहीं मानी तो प्रदर्शन आगे बढ़ेगा।
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पुलिस को चकमा देकर बड़ी संख्या
में कर्मी सचिवालय के बाहर पहुंचे
डेलीवेजरों ने सचिवालय घेराव के दौरान पुलिस को चकमा दिया। बड़ी संख्या में कर्मी इंदिरा चौक से सचिवालय की तरफ बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच ही बड़ी संख्या में कर्मी दूसरे रास्ते से सचिवालय के बाहर पहुंच गए। उनके वहां पहुंचने की सूचना जब तक पुलिस को लगती तब तक कर्मियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा की कार्यवाही खत्म होने के बाद किश्तवाड़ और राजोरी से विधायक ने कर्मियों से बातचीत की। कर्मियों ने दावा किया अन्य सभी विधायक दूसरे रास्ते से होते हुए निकल गए।
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जाम से लोग हुए बेहाल
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बुरा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। इंदिरा चौक, बीसी रोड, डोगरा चौक और रेजिडेंसी रोड पर घंटों तक वाहनों के पहिए थमे रहे। स्कूली बसों और एंबुलेंस को भी निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। देर शाम पुलिस द्वारा कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद ही यातायात सुचारु हो सका।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नियमितीकरण की ठोस नीति, न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने सहित अन्य मांगों के समर्थन में बुधवार को जलशक्ति विभाग में संविदा कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मियों ने सचिवालय की ओर बढ़ने की कोशिश की तो इंदिरा चौक पर बवाल हो गया। गुस्साए कर्मियों ने जब पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की तो स्थिति अनियंत्रित हो गई। इस बीच धक्का-मुक्की हुई। इसमें कुछ कर्मचारी सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए।
सुबह करीब 10:30 बजे बीसी रोड स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर हजारों की संख्या में डेलीवेजर जुटना शुरू हुए। दो घंटे तक कार्यालय परिसर में नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने डेलीवेजरों को नियमित करने की बात की है लेकिन स्पष्टता नहीं है। कैसे और कब तक कर्मियों को नियमित किया जाएगा यह नहीं बताया। दोपहर करीब एक बजे नारों के बीच कर्मियों का जनसैलाब सचिवालय की ओर बढ़ा। पुलिस को इसकी जानकारी पहले से थी। इसके लिए इंदिरा चौक पर सचिवालय जाने वाले दोनों रास्तों को छावनी में बदल दिया गया। बैरिकेड्स लगाए गए थे उनके आगे कटीले तार बिछाए थे। पुलिसकर्मी आंसू गैस वाली बंदूक लेकर तैनात थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी तारों के पास पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। कर्मचारी नेताओं से बातचीत करने की कोशिश थी लेकिन बात नहीं बनी। देखते ही देखते टकराव की स्थिति पैदा हो गई। कर्मी सड़क पर ही बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। करीब एक घंटे तक बैठने के बाद कर्मियों के सबर का बांध टूट गया और कंटीले तार व बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान हुई खींचतान में कुछ कर्मी गिर गए।
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30 मार्च तक सरकार को दिया समय
यूनाइटेड इंप्लाइज फ्रंट के सदस्य होशियार चिब ने कहा कि सरकार कई वर्षों से सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी पिला रही है। हमारी मांग है कि संविदा कर्मियों के लिए नियमितीकरण नीति घोषित हो। लंबित वेतन जारी हो यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द मुहर नहीं लगाई तो आने वाले दिनों में जम्मू संभाग की जलापूर्ति ठप कर दी जाएगी। कर्मियों ने 30 मार्च तक प्रदेश सरकार को समय दिया है। इसी दिन 72 घंटे की काम छोड़ हड़ताल होगी। अगर फिर भी सरकार नहीं मानी तो प्रदर्शन आगे बढ़ेगा।
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पुलिस को चकमा देकर बड़ी संख्या
में कर्मी सचिवालय के बाहर पहुंचे
डेलीवेजरों ने सचिवालय घेराव के दौरान पुलिस को चकमा दिया। बड़ी संख्या में कर्मी इंदिरा चौक से सचिवालय की तरफ बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच ही बड़ी संख्या में कर्मी दूसरे रास्ते से सचिवालय के बाहर पहुंच गए। उनके वहां पहुंचने की सूचना जब तक पुलिस को लगती तब तक कर्मियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा की कार्यवाही खत्म होने के बाद किश्तवाड़ और राजोरी से विधायक ने कर्मियों से बातचीत की। कर्मियों ने दावा किया अन्य सभी विधायक दूसरे रास्ते से होते हुए निकल गए।
जाम से लोग हुए बेहाल
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बुरा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा। इंदिरा चौक, बीसी रोड, डोगरा चौक और रेजिडेंसी रोड पर घंटों तक वाहनों के पहिए थमे रहे। स्कूली बसों और एंबुलेंस को भी निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। देर शाम पुलिस द्वारा कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद ही यातायात सुचारु हो सका।