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राहत राशि बढ़ाने सहित घाटी में हो सुरक्षित वापसी
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जम्मू। कश्मीरी पंडितों की राहत राशि में बढ़ोतरी करने सहित घाटी में सुरक्षित वापसी करवाई जाए। यह मांग जगती टेनमेंट कमेटी और सोन फ्रंट के बैनर तले कश्मीरी पंडितों उठाई है। सोमवार को जगती में लगातार 556वें दिन प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की। वहीं, लंबित मांगें अभी तक पूरी नहीं होने पर सरकारी के खिलाफ रोष जताया है।
प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए टेनमेंट कमेटी के अध्यक्ष शादी लाल पंडिता ने कहा कि 2014 और 2019 में भाजपा सरकार ने जो वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं हो सका है। सिर्फ निराशा हाथ लगी है। लोग आए दिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। समाधान निकालने के लिए कोई तैयार नहीं है। कश्मीरी विस्थापितों के पास पैसा नहीं है कि वे बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रख सकें। एक कमरे में दो-दो परिवार रहने के लिए मजबूर हैं।
परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है। साधन कम हैं, जिस कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। विस्थापितों के पास कोई संपत्ति नहीं है। डेढ़ साल से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई भी सुध नहीं ले रहा है। 32 सालों से विस्थापित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों ने बारामुला, श्रीनगर और अनंतनाग से सटे स्थानों पर विस्थापितों के लिए रहने की व्यवस्था करने के साथ ही राहत राशि तेरह हजार से पच्चीस हजार करने की मांग उठाई है।
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प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए टेनमेंट कमेटी के अध्यक्ष शादी लाल पंडिता ने कहा कि 2014 और 2019 में भाजपा सरकार ने जो वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं हो सका है। सिर्फ निराशा हाथ लगी है। लोग आए दिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। समाधान निकालने के लिए कोई तैयार नहीं है। कश्मीरी विस्थापितों के पास पैसा नहीं है कि वे बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रख सकें। एक कमरे में दो-दो परिवार रहने के लिए मजबूर हैं।
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परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है। साधन कम हैं, जिस कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। विस्थापितों के पास कोई संपत्ति नहीं है। डेढ़ साल से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई भी सुध नहीं ले रहा है। 32 सालों से विस्थापित दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों ने बारामुला, श्रीनगर और अनंतनाग से सटे स्थानों पर विस्थापितों के लिए रहने की व्यवस्था करने के साथ ही राहत राशि तेरह हजार से पच्चीस हजार करने की मांग उठाई है।
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