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एसआरओ 43 में किसी तरह का बदलाव सहन नहीं
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जम्मू। अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने, स्वास्थ्य भत्ते में बढ़ोतरी, डीए का एरियर जारी करने, एसआरओ 43 में बदलाव नहीं करने, हर छह महीने के बाद डीपीसी करने सहित अन्य मांगों के समर्थन में कर्मचारी संगठनों ने प्रदर्शन किया। मंगलवार को प्रेस क्लब के बाहर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने जेएंडके ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले एकत्रित हुए।
कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश में कर्मचारियों की बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों की क्या स्थिति होगी। प्रदेश में नौकरशाही हावी है और कर्मचारी विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष बाबू हुसैन मालिक ने कहा कि सरकार एसआरओ 43 के प्रावधानों में बदलाव करने की कोशिश कर रही है।
एसआरओ 43 में किसी तरह का भी बदलाव हमें मंजूरी नहीं है। एसआरओ 43 के सरकारी कर्मचारी की सेवा में रहते मृत्यु पर कर्मचारी के परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलती है। सरकार इसे अब सिर्फ कुछ मामले में लागू रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों से भी अधिक विभिन्न विभागों में तैनात अस्थायी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है।
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इन कर्मचारियों से बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू नहीं हो पाया है। सरकार को चाहिए कि अब वे इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति बनाए। कर्मचारियों ने कहा कि अगर हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। इसी तरह का प्रदर्शन श्रीनगर में हुआ।
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कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश में कर्मचारियों की बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों की क्या स्थिति होगी। प्रदेश में नौकरशाही हावी है और कर्मचारी विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष बाबू हुसैन मालिक ने कहा कि सरकार एसआरओ 43 के प्रावधानों में बदलाव करने की कोशिश कर रही है।
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एसआरओ 43 में किसी तरह का भी बदलाव हमें मंजूरी नहीं है। एसआरओ 43 के सरकारी कर्मचारी की सेवा में रहते मृत्यु पर कर्मचारी के परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलती है। सरकार इसे अब सिर्फ कुछ मामले में लागू रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों से भी अधिक विभिन्न विभागों में तैनात अस्थायी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है।
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इन कर्मचारियों से बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू नहीं हो पाया है। सरकार को चाहिए कि अब वे इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति बनाए। कर्मचारियों ने कहा कि अगर हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। इसी तरह का प्रदर्शन श्रीनगर में हुआ।