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विवाहिता की मौत से भड़के परिजन जीएमसी पर लापरवाही का आरोप
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जम्मू। जीएमसी से लुधियाना ले जाई गई विवाहिता ने दम तोड़ दिया। मौत से भड़के परिजनों ने जीएमसी प्रबंधन पर इलाज में कोताही का आरोप लगाया। साथ ही वीडियो वायरल कर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विवाहिता को गंभीर हालत में चार दिन पहले जीएमसी में भर्ती कराया था। ठीक से इलाज न मिलने का आरोप लगाकर परिजन उसे लुधियाना ले गए, जहां पांच जनवरी को उसकी मौत हो गई। उधर, जीएमसी प्रबंधन ने ऐसी शिकायत न मिलने की बात कही है।
अब्दुल रहमान निवासी दार साकड़ी (राजोरी) ने बताया कि उसकी बेटी सफीना कोसर से पति ने मारपीट की थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद वे बेटी को जीएमसी जम्मू लेकर आए थे, लेकिन इमरजेंसी में एक रात रखकर उसे दूसरे दिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। ठीक से इलाज न होने से बेटी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रात को स्टाफ का कोई सदस्य देखने भी नहीं आया। अगले दिन हालात ज्यादा बिगड़ने पर बेटी को फिर से इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन अस्पताल की कार्यप्रणाली से निराश होकर वह बेटी को लुधियाना के अस्पताल में ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इलाज में देरी की वजह से उनकी बेटी की मौत हुई है। परिवार ने वीडियो वायरल कर जीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और प्र्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने आरोप लगाया कि जीएमसी में उचित इलाज मिलता तो उनकी बेटी की जान बच जाती। वीरवार को जीएमसी राजोरी में पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। राजोरी में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
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एक अन्य मामले में महिला
की मौत पर भड़के परिजन
बीते रोज भी एक अन्य मामले में उधमपुर से आई एक महिला की ऑपरेशन से पहले इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई। उसके तीमारदारों ने भी जीएमसी की इमरजेंसी के बाहर विरोध जताकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि मरीज को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया।
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नहीं मिली कोई शिकायत : अधीक्षक
जीएमसी जम्मू के अधीक्षक डॉ. दारा सिंह ने कहा कि इलाज न मिलने की तीमारदारों की ओर से ऐसी कोई शिकायत अस्पताल प्रशासन को नहीं दी गई है। अलबत्ता सभी वार्डों में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध रहता है।
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अब्दुल रहमान निवासी दार साकड़ी (राजोरी) ने बताया कि उसकी बेटी सफीना कोसर से पति ने मारपीट की थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद वे बेटी को जीएमसी जम्मू लेकर आए थे, लेकिन इमरजेंसी में एक रात रखकर उसे दूसरे दिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। ठीक से इलाज न होने से बेटी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रात को स्टाफ का कोई सदस्य देखने भी नहीं आया। अगले दिन हालात ज्यादा बिगड़ने पर बेटी को फिर से इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन अस्पताल की कार्यप्रणाली से निराश होकर वह बेटी को लुधियाना के अस्पताल में ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इलाज में देरी की वजह से उनकी बेटी की मौत हुई है। परिवार ने वीडियो वायरल कर जीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और प्र्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने आरोप लगाया कि जीएमसी में उचित इलाज मिलता तो उनकी बेटी की जान बच जाती। वीरवार को जीएमसी राजोरी में पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। राजोरी में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
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एक अन्य मामले में महिला
की मौत पर भड़के परिजन
बीते रोज भी एक अन्य मामले में उधमपुर से आई एक महिला की ऑपरेशन से पहले इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई। उसके तीमारदारों ने भी जीएमसी की इमरजेंसी के बाहर विरोध जताकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि मरीज को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया।
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नहीं मिली कोई शिकायत : अधीक्षक
जीएमसी जम्मू के अधीक्षक डॉ. दारा सिंह ने कहा कि इलाज न मिलने की तीमारदारों की ओर से ऐसी कोई शिकायत अस्पताल प्रशासन को नहीं दी गई है। अलबत्ता सभी वार्डों में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध रहता है।