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जम्मू में निकाली रोष रैली, पंजाबी के लिए मांगा राजभाषा का दर्जा
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जम्मू। पंजाबी को भी राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सिख समुदाय व अन्य संगठनों ने रविवार को रोष रैली निकाली। सुबह 8.30 बजे चट्ठा फार्म से निकली रैली 10 बजे के करीब डिग्याना आश्रम में जाकर संपन्न हुई। मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों पर सवार युवा इस रोष रैली का हिस्सा बने। मांग की गई कि पंजाबी भाषा को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं में शामिल किया जाए। रैली में सिख नौजवान सभा चट्ठा के अलावा पंजाबी लेखक सभा, पंजाबी भाषा संघर्ष कमेटी, गुरुद्वारा लोकल कमेटी कार्पोरेटर और अन्य संगठन शामिल हुए।
रैली में प्रदर्शनकारियों ने मांगों को लेकर खूब नारेबाजी की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वह पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषाओं में शामिल करें। इस दौरान सभी प्रदर्शनकारियों ने शपथ ग्रहण की कि जब तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया जाता तक तक यह प्रदर्शन इसी तरह से जारी रहेंगे।
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पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा न मिलना भेदभाव
केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिया गया है लेकिन पंजाबी को शामिल न कर सिख समुदाय के साथ बहुत ही भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है। पंजाबी बहुत ही मीठी और प्यारी भाषा है। संस्कृति और व्याकरण की दृष्टि से भी यह भाषा समृद्ध है। सरकार से हमारी गुजारिश है कि इस समुदाय की न्यायपूर्ण मांग को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक स्तर पर इस भाषा को भी अन्य भाषाओं की तरह लागू किया जाए ताकि पंजाबी भाषा प्रेमियों की भावनाओं को किसी प्रकार की ठेस न पहुंचे और सिख समुदाय भी अन्य भाषाओं के साथ जम्मू-कश्मीर में बराबरी के दर्जे पर काबिज हो सकें।
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- सुरजीत कौर, शोधार्थी, हिंदी विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय
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रैली में प्रदर्शनकारियों ने मांगों को लेकर खूब नारेबाजी की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वह पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषाओं में शामिल करें। इस दौरान सभी प्रदर्शनकारियों ने शपथ ग्रहण की कि जब तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया जाता तक तक यह प्रदर्शन इसी तरह से जारी रहेंगे।
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पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा न मिलना भेदभाव
केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिया गया है लेकिन पंजाबी को शामिल न कर सिख समुदाय के साथ बहुत ही भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है। पंजाबी बहुत ही मीठी और प्यारी भाषा है। संस्कृति और व्याकरण की दृष्टि से भी यह भाषा समृद्ध है। सरकार से हमारी गुजारिश है कि इस समुदाय की न्यायपूर्ण मांग को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक स्तर पर इस भाषा को भी अन्य भाषाओं की तरह लागू किया जाए ताकि पंजाबी भाषा प्रेमियों की भावनाओं को किसी प्रकार की ठेस न पहुंचे और सिख समुदाय भी अन्य भाषाओं के साथ जम्मू-कश्मीर में बराबरी के दर्जे पर काबिज हो सकें।
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- सुरजीत कौर, शोधार्थी, हिंदी विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय