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वीकेंड लॉकडाउन से पहले बाजारों में भीड़
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रक्षाबंधन के लिए गांधीनगर मार्केट में खरीदारी करते लोग।
- फोटो : SHRINAGAR
जम्मू। वीकेंड लॉकडाउन से पहले शुक्रवार को बाजारों में बेतहाशा भीड़ पहुंची। ईद और रक्षाबंधन की खरीदारी के लिए हजारों लोग बाहर निकले। इससे राहगीरों के साथ वाहनों का सड़कों पर जबरदस्त दबाव रहा। जगह-जगह जाम की स्थिति रही। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए कई जगह पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों को कसरत करनी पड़ी। लॉकडाउन के चलते शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेंगे।
शुक्रवार दिन चढ़ने के साथ बाजार में खरीदारी की भीड़ पहुंचना शुरू हो गई थी। पुराने शहर के पुरानी मंडी, राज तिलक रोड, मोती बाजार, सिटी चौक, शालामार, गांधीनगर, शास्त्रीनगर, तालाब तिल्लो, जानीपुर, ज्यूल सहित अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में लोग ईद और रक्षाबंधन की खरीदारी के लिए बाहर निकले। दोपहर को कई बाजार खरीदारों से पूरी तरह से पैक थे। खासतौर पर पुराने शहर में अधिक जाम रहा। यात्री वाहनों के चलने से आसपास के इलाकों से भी लोग शहर में खरीदारी के लिए पहुंचे।
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मिठाई की जगह ड्राई फ्रूट पहली पसंद
इस बार त्योहारों से पहले वीकेंड लॉकडाउन लगने के कारण लोगों ने मिठाई की जगह ड्राई फ्रूट व अन्य दूसरी गिफ्ट आइटमों को ज्यादा तवज्जो दी। इसका एक कारण यह भी था कि अगर शुक्रवार को मिठाई खरीद लेते तो उसे दो दिन रखना पड़ता। हालांकि ईद के लिए मिठाई की खरीदारी हुई। ड्राई फ्रूट रिटेल एसोसिएशन ज्यूल के प्रधान ज्योति स्वरूप ने बताया कि पिछले दिनों के मुकाबले शुक्रवार को ड्राई फ्रूट की अच्छी बिक्री हुई। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर वीकेंड लॉकडाउन से इस सीजन से जुड़े कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ है। वह पूरा साल इन्हीं कुछ दिनों का इंतजार करते हैं, जिसमें उनकी अच्छी बिक्री होती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। जबकि कारोबारी पहले से ही कोरोना महामारी के साथ लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं। जिला प्रशासन को वीकेंड लॉकडाउन आगामी दिनों में करने के लिए आग्रह किया गया था। वहीं, लाकडाउन के चलते मिठाई विक्रेताओं ने मिठाई का उत्पादन नहीं किया है, क्योंकि उन्हें अगले दो दिन मिठाई फ्रीज करनी पड़ती। शहर में मिठाई का कारोबार करने वाले राजेश दत्ता ने बताया कि अब वे सोमवार सुबह त्योहार के हिसाब से मिठाई तैयार करेंगे। इस बार लॉकडाउन के चलते मिठाई की बिक्री नहीं हुई है और न ही इसका अधिक उत्पादन किया गया।
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सामाजिक दूरी की जमकर उड़ीं धज्जियां
शुक्रवार को बाजारों में खरीदारों की खचाखच भीड़ के बीच सामाजिक दूरी की जमकर धज्जियां उड़ीं। कई बाजारों में इसका कोई पालन होता नहीं दिखा। यहां तक कि लोग एक दूसरे से टकराते हुए आगे बढ़ते रहे। दुकानों के भीतर भी ऐसा ही हाल रहा। खासतौर पर छोटी दुकानों में एक साथ कई ग्राहक खड़े नजर आए और ना ही दुकानदार इसका पालन करते दिखे। वहीं, बाजारों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थो जो बिना मास्क टहल रहे थे। प्रशासन की ओर से मास्क न पहनने पर जुर्माने की कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही दिख रही है।
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पतंगबाजी के शौकीनों ने जमकर की खरीदारी
रक्षाबंधन और जन्माष्टमी पर संभाग के विभिन्न हिस्सों में जमकर पतंगबाजी होती है। लेकिन वीकेंड लॉकडाउन के चलते शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेंगे। जिससे पतंगबाजी के शौकीनों ने शुक्रवार को जमकर पतंगों और डोर की खरीदारी की। पुराने शहर के प्रमुख पक्का डंगा बाजार में सुबह से ही पतंगों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ पहुंचना शुरू हो गई थी। इसमें आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों ने आकर खरीदारी की। पतंगबाजी के नशे में बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। इस खास दो दिन में छतों पर डीजे की धुनों व अन्य म्यूजिक सिस्टम के साथ पतंगबाजी का मजा लिया जाता है। पतंगबाजी के शौकीनों में कइयों ने आर्डर पर विशाल पतंगे बनवाई हैं, जिन्हें सोमवार को आसमान में उड़ाया जाएगा।
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गट्टू डोर की कमी दिखी
कोरोना महामारी और चीन के पदार्थों के बहिष्कार का असर पतंगबाजी के बाजार पर भी दिखा। इस बार चीन से आने वाली पतंगों और डोर में कमी दिखी। पिछले साल का ही बचा माल इस बार बेचा गया। चीनी मांझा गट्टू डोर प्रतिबंधित है, लेकिन हर साल इसकी भारी मांग रहती है। इस साल गट्टू के बजाय पारंपरिक डोर की अधिक बिक्री हुई। श्रमिकों की कमी के चलते पतंगों और डोर का पर्याप्त उत्पादन भी नहीं हुआ है। इसमें दिल्ली, पंजाब सहित अन्य राज्यों से पतंगें और डोर मंगवाई जाती है, जबकि स्थानीय स्तर पर भी यह माल तैयार किया जाता है।
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बाजार में इस बार गिफ्ट पैक भी कम
कोरोना वायरस का असर राखी के त्योहार पर देखने को मिल रहा है। इस साल बाजार में हर साल राखी पर आने वाले गिफ्ट पैक बेहद ही कम आए हैं। हर साल विभिन्न तरह के गिफ्ट बाजार में उपलब्ध होते थे जो भाई और बहन एक-दूसरे को भेंट करते थे पर इस साल बहुत ही कम गिफ्ट पैक मिल रहे हैं।
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दूर से आने वाली बहनों के लिए लॉकडाउन समस्या
लॉकडाउन की वजह से दूर-दराज इलाकों से आने वाली बहनों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। जम्मू के कई जिलों में पूरी तरह से लॉकडाउन लगा है, ऐसे में भाई को राखी बांधने के लिए पहुंचना उनके लिए बड़ी परेशानी साबित हो सकती है। निजी वाहनों से कुछ लोग फिर भी पहुंच जाएंगे, लेकिन जो पूरी तरह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं, उनके लिए राखी का त्योहार फीका पड़ने की वजह लॉकडाउन बन सकता है।
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शुक्रवार दिन चढ़ने के साथ बाजार में खरीदारी की भीड़ पहुंचना शुरू हो गई थी। पुराने शहर के पुरानी मंडी, राज तिलक रोड, मोती बाजार, सिटी चौक, शालामार, गांधीनगर, शास्त्रीनगर, तालाब तिल्लो, जानीपुर, ज्यूल सहित अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में लोग ईद और रक्षाबंधन की खरीदारी के लिए बाहर निकले। दोपहर को कई बाजार खरीदारों से पूरी तरह से पैक थे। खासतौर पर पुराने शहर में अधिक जाम रहा। यात्री वाहनों के चलने से आसपास के इलाकों से भी लोग शहर में खरीदारी के लिए पहुंचे।
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मिठाई की जगह ड्राई फ्रूट पहली पसंद
इस बार त्योहारों से पहले वीकेंड लॉकडाउन लगने के कारण लोगों ने मिठाई की जगह ड्राई फ्रूट व अन्य दूसरी गिफ्ट आइटमों को ज्यादा तवज्जो दी। इसका एक कारण यह भी था कि अगर शुक्रवार को मिठाई खरीद लेते तो उसे दो दिन रखना पड़ता। हालांकि ईद के लिए मिठाई की खरीदारी हुई। ड्राई फ्रूट रिटेल एसोसिएशन ज्यूल के प्रधान ज्योति स्वरूप ने बताया कि पिछले दिनों के मुकाबले शुक्रवार को ड्राई फ्रूट की अच्छी बिक्री हुई। उन्होंने कहा कि त्योहारों पर वीकेंड लॉकडाउन से इस सीजन से जुड़े कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ है। वह पूरा साल इन्हीं कुछ दिनों का इंतजार करते हैं, जिसमें उनकी अच्छी बिक्री होती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। जबकि कारोबारी पहले से ही कोरोना महामारी के साथ लॉकडाउन की मार झेल रहे हैं। जिला प्रशासन को वीकेंड लॉकडाउन आगामी दिनों में करने के लिए आग्रह किया गया था। वहीं, लाकडाउन के चलते मिठाई विक्रेताओं ने मिठाई का उत्पादन नहीं किया है, क्योंकि उन्हें अगले दो दिन मिठाई फ्रीज करनी पड़ती। शहर में मिठाई का कारोबार करने वाले राजेश दत्ता ने बताया कि अब वे सोमवार सुबह त्योहार के हिसाब से मिठाई तैयार करेंगे। इस बार लॉकडाउन के चलते मिठाई की बिक्री नहीं हुई है और न ही इसका अधिक उत्पादन किया गया।
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सामाजिक दूरी की जमकर उड़ीं धज्जियां
शुक्रवार को बाजारों में खरीदारों की खचाखच भीड़ के बीच सामाजिक दूरी की जमकर धज्जियां उड़ीं। कई बाजारों में इसका कोई पालन होता नहीं दिखा। यहां तक कि लोग एक दूसरे से टकराते हुए आगे बढ़ते रहे। दुकानों के भीतर भी ऐसा ही हाल रहा। खासतौर पर छोटी दुकानों में एक साथ कई ग्राहक खड़े नजर आए और ना ही दुकानदार इसका पालन करते दिखे। वहीं, बाजारों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थो जो बिना मास्क टहल रहे थे। प्रशासन की ओर से मास्क न पहनने पर जुर्माने की कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही दिख रही है।
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पतंगबाजी के शौकीनों ने जमकर की खरीदारी
रक्षाबंधन और जन्माष्टमी पर संभाग के विभिन्न हिस्सों में जमकर पतंगबाजी होती है। लेकिन वीकेंड लॉकडाउन के चलते शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेंगे। जिससे पतंगबाजी के शौकीनों ने शुक्रवार को जमकर पतंगों और डोर की खरीदारी की। पुराने शहर के प्रमुख पक्का डंगा बाजार में सुबह से ही पतंगों की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ पहुंचना शुरू हो गई थी। इसमें आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों ने आकर खरीदारी की। पतंगबाजी के नशे में बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। इस खास दो दिन में छतों पर डीजे की धुनों व अन्य म्यूजिक सिस्टम के साथ पतंगबाजी का मजा लिया जाता है। पतंगबाजी के शौकीनों में कइयों ने आर्डर पर विशाल पतंगे बनवाई हैं, जिन्हें सोमवार को आसमान में उड़ाया जाएगा।
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गट्टू डोर की कमी दिखी
कोरोना महामारी और चीन के पदार्थों के बहिष्कार का असर पतंगबाजी के बाजार पर भी दिखा। इस बार चीन से आने वाली पतंगों और डोर में कमी दिखी। पिछले साल का ही बचा माल इस बार बेचा गया। चीनी मांझा गट्टू डोर प्रतिबंधित है, लेकिन हर साल इसकी भारी मांग रहती है। इस साल गट्टू के बजाय पारंपरिक डोर की अधिक बिक्री हुई। श्रमिकों की कमी के चलते पतंगों और डोर का पर्याप्त उत्पादन भी नहीं हुआ है। इसमें दिल्ली, पंजाब सहित अन्य राज्यों से पतंगें और डोर मंगवाई जाती है, जबकि स्थानीय स्तर पर भी यह माल तैयार किया जाता है।
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बाजार में इस बार गिफ्ट पैक भी कम
कोरोना वायरस का असर राखी के त्योहार पर देखने को मिल रहा है। इस साल बाजार में हर साल राखी पर आने वाले गिफ्ट पैक बेहद ही कम आए हैं। हर साल विभिन्न तरह के गिफ्ट बाजार में उपलब्ध होते थे जो भाई और बहन एक-दूसरे को भेंट करते थे पर इस साल बहुत ही कम गिफ्ट पैक मिल रहे हैं।
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दूर से आने वाली बहनों के लिए लॉकडाउन समस्या
लॉकडाउन की वजह से दूर-दराज इलाकों से आने वाली बहनों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। जम्मू के कई जिलों में पूरी तरह से लॉकडाउन लगा है, ऐसे में भाई को राखी बांधने के लिए पहुंचना उनके लिए बड़ी परेशानी साबित हो सकती है। निजी वाहनों से कुछ लोग फिर भी पहुंच जाएंगे, लेकिन जो पूरी तरह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं, उनके लिए राखी का त्योहार फीका पड़ने की वजह लॉकडाउन बन सकता है।